किसी को आपकी कहानी में कोई दिलचस्पी नही होती जब तक कि आप जीत नही जाते
डिग्रियाँ तो तालीम के ख़र्चे की रसीदें हैं...इल्म वही है जो किरदार में झलकता है.
शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं
अगर आपके अंदर धैर्य है तो निश्चित ही आप ज़िन्दगी के हर कठिन से कठिन फैसले का सही निर्णय कर सकते हैं।
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है
ज्वाला जगा अन्दर, किस बात से है तंग, दुनिया से नहीं, खुद से है तेरी जंग
किसी को आपकी कहानी में कोई दिलचस्पी नही होती जब तक कि आप जीत नही जाते
डिग्रियाँ तो तालीम के ख़र्चे की रसीदें हैं...इल्म वही है जो किरदार में झलकता है.
शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं
अगर आपके अंदर धैर्य है तो निश्चित ही आप ज़िन्दगी के हर कठिन से कठिन फैसले का सही निर्णय कर सकते हैं।
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है
ज्वाला जगा अन्दर, किस बात से है तंग, दुनिया से नहीं, खुद से है तेरी जंग