अगर इंसान सच्चा होगा तो सब कुछ अच्छा होगा
""कामयाबी"" के सफर में "धूप" का बड़ा महत्व होता हैं! क्योंकि ""छांव"" मिलते ही "कदम" रुकने लगते है।
ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं, जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं।
मैं सब जानता हूँ यही सोच इंसान को कुएँ का मेंढक बना देती है।
आपकी अच्छाइयों, बेशक अदृश्य हो सकती है लेकिन, इनकी छाप हमेशा दूसरों के हृदय में विराजमान रहती है
धीरे-धीरे आगे बढ़ते रहना भी अच्छा है..कम से कम उन लोगो से तो आगे रहोगे जो Try भी नही कर रहे
अगर इंसान सच्चा होगा तो सब कुछ अच्छा होगा
""कामयाबी"" के सफर में "धूप" का बड़ा महत्व होता हैं! क्योंकि ""छांव"" मिलते ही "कदम" रुकने लगते है।
ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं, जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं।
मैं सब जानता हूँ यही सोच इंसान को कुएँ का मेंढक बना देती है।
आपकी अच्छाइयों, बेशक अदृश्य हो सकती है लेकिन, इनकी छाप हमेशा दूसरों के हृदय में विराजमान रहती है
धीरे-धीरे आगे बढ़ते रहना भी अच्छा है..कम से कम उन लोगो से तो आगे रहोगे जो Try भी नही कर रहे