जीवन कठिन तब लगता है जब हम स्वयं में बदलाव करने के बजय परिस्थितयो को बदलने का प्रयास करते है
घड़ी ठीक करने वाले बहुत है मगर समय तो मेरा मुरली वाला ही ठीक करता है..
झूठ का भी अजीब 'जायका' है स्वयं बोलो तो मीठा' लगता है कोई और बोले तो 'कड़वा'
समय अच्छा हो तो बन जाते है सभी साथी लेकिन समय मुश्किल हो तो खुद पे भारोश रखना..
भीड़ में सभी लोग अच्छे नहीं होते और अच्छे लोगों की कभी भीड़ नहीं होती
जल्दी जागना हमेशा ही फायदेमंद होता है, फिर चाहे वो नींद से हो या अहम से हो या फिर वहम से हो।
जीवन कठिन तब लगता है जब हम स्वयं में बदलाव करने के बजय परिस्थितयो को बदलने का प्रयास करते है
घड़ी ठीक करने वाले बहुत है मगर समय तो मेरा मुरली वाला ही ठीक करता है..
झूठ का भी अजीब 'जायका' है स्वयं बोलो तो मीठा' लगता है कोई और बोले तो 'कड़वा'
समय अच्छा हो तो बन जाते है सभी साथी लेकिन समय मुश्किल हो तो खुद पे भारोश रखना..
भीड़ में सभी लोग अच्छे नहीं होते और अच्छे लोगों की कभी भीड़ नहीं होती
जल्दी जागना हमेशा ही फायदेमंद होता है, फिर चाहे वो नींद से हो या अहम से हो या फिर वहम से हो।