जीवन मे सिर्फ वहाँ तक ही "झुकना' चाहिए जहाँ तक सम्बन्धो में "लचकता" और मन मे "आत्मसम्मान" बना रहे
भरोशा करो लेकिन किसी के भरोशे मत रहो ।
मंजिल मेरे कदमों से अभी दूर बहुत है... मगर तसल्ली ये है कि कदम मेरे साथ हैं
दूध के लिए हथिनी पालने की जरुरत नहीं होती। अर्थात आवश्कयता के अनुसार साधन जुटाने चाहिए।
बातें ऐसी मत करो जिससे तुम्हारी परवरिश पर सवाल उठे
. जितना ज्यादा दूर से देखोगे लोग उतने ज्यादा अच्छे लगेंगे
जीवन मे सिर्फ वहाँ तक ही "झुकना' चाहिए जहाँ तक सम्बन्धो में "लचकता" और मन मे "आत्मसम्मान" बना रहे
भरोशा करो लेकिन किसी के भरोशे मत रहो ।
मंजिल मेरे कदमों से अभी दूर बहुत है... मगर तसल्ली ये है कि कदम मेरे साथ हैं
दूध के लिए हथिनी पालने की जरुरत नहीं होती। अर्थात आवश्कयता के अनुसार साधन जुटाने चाहिए।
बातें ऐसी मत करो जिससे तुम्हारी परवरिश पर सवाल उठे
. जितना ज्यादा दूर से देखोगे लोग उतने ज्यादा अच्छे लगेंगे