शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है।
आजादी अच्छी चीज है, लेकिन ? कबूतर को ? आजाद कराने के लिए पिजरे का दरवाजा बिल्ली खोले तो समझदारी पिंजरे में रहने में ही है..!!
संसार में सुई बनकर रहे, कैंची बनकर नही क्योंकि सुई 2 को 1 कर देती है और कैंची 1 को 2 कर देती है अर्थात सबको जोड़ो, तोड़ो नही
अगर ज़िन्दगी में कामयाब होना चाहते हो…तो बोलने से ज़्यादा सुनने की आदत डालो…!!
तकलीफ़े भी अच्छी है..
रात भर गहरी नींद आना इतना आसान नहीं उसके लिए दिन भर ईमानदारी से जीना पड़ता हैं
शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है।
आजादी अच्छी चीज है, लेकिन ? कबूतर को ? आजाद कराने के लिए पिजरे का दरवाजा बिल्ली खोले तो समझदारी पिंजरे में रहने में ही है..!!
संसार में सुई बनकर रहे, कैंची बनकर नही क्योंकि सुई 2 को 1 कर देती है और कैंची 1 को 2 कर देती है अर्थात सबको जोड़ो, तोड़ो नही
अगर ज़िन्दगी में कामयाब होना चाहते हो…तो बोलने से ज़्यादा सुनने की आदत डालो…!!
तकलीफ़े भी अच्छी है..
रात भर गहरी नींद आना इतना आसान नहीं उसके लिए दिन भर ईमानदारी से जीना पड़ता हैं