इंसान सफल तब होता है जब वो जरूरत और चाहत के बीच फर्क समझ लेता है
शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है।
एक दिन में जितना मोबाइल चलाते हो..उतना ही दिमाग चलाओगे तो ज़िन्दगी में बहुत आगे जाओगे
किस ने गिनी हैं साँसे कितनी यह आएंगी ना जाने कौन सी सांसें मेरी मुझे मेरे कृष्णा से मिलाएगी
सिर्फ अपनी नही बल्कि दुसरो की गलतियों से भी सीखो, क्योंकि लक्ष्य बड़ा है और समय कम
हमेशा दूसरों की सफलता के बारे में जानने के बजाय खुद की सफलता पर काम कीजिए
इंसान सफल तब होता है जब वो जरूरत और चाहत के बीच फर्क समझ लेता है
शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है।
एक दिन में जितना मोबाइल चलाते हो..उतना ही दिमाग चलाओगे तो ज़िन्दगी में बहुत आगे जाओगे
किस ने गिनी हैं साँसे कितनी यह आएंगी ना जाने कौन सी सांसें मेरी मुझे मेरे कृष्णा से मिलाएगी
सिर्फ अपनी नही बल्कि दुसरो की गलतियों से भी सीखो, क्योंकि लक्ष्य बड़ा है और समय कम
हमेशा दूसरों की सफलता के बारे में जानने के बजाय खुद की सफलता पर काम कीजिए