"सफलता का सफर कितना अच्छा होगा, यह हमारे विचार और व्यवहार पर निर्भर करता है।"
वक्त बीतने के बाद अक्सर यह अहसास होता है.. जो छूट गया वो लम्हा
गलतियाँ ढूँढना गलत नही है...!! बस शुरुआत खुद से होनी चाहिए...!!!
गुरु का हाथ पकड़ के चलो, लोगों के पैर पकड़ने की नौबत नहीं आएगी
यदि तुम अपनी ज़िंदगी अपने तरीके से नही जिओगे, तो लोग अपने तरीके तुम पर लाद देंगे
दुष्टों से दुष्टता करने में कोई दोष नहीं है.
"सफलता का सफर कितना अच्छा होगा, यह हमारे विचार और व्यवहार पर निर्भर करता है।"
वक्त बीतने के बाद अक्सर यह अहसास होता है.. जो छूट गया वो लम्हा
गलतियाँ ढूँढना गलत नही है...!! बस शुरुआत खुद से होनी चाहिए...!!!
गुरु का हाथ पकड़ के चलो, लोगों के पैर पकड़ने की नौबत नहीं आएगी
यदि तुम अपनी ज़िंदगी अपने तरीके से नही जिओगे, तो लोग अपने तरीके तुम पर लाद देंगे
दुष्टों से दुष्टता करने में कोई दोष नहीं है.