किसी को डर है कि भगवान देख रहा है किसी को भरोसा है कि भगवान देख रहा है
मनुष्य रूप, यौवन और मदिरा में खोकर अपने आप को ही भूल जाता है, लेकिन जब उसे होश आता है तो नरक का द्वार उसके सामने होता है. अर्थात सूरा-सुंदरी का सुख मनुष्य को नरक के अतिरिक्त कुछ नहीं दे सकता. इससे बचना ही श्रेयस्कर है.
इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी अपनी तुलना दूसरो से करना
ढुढो सुकून तोह ख़ुद में हे दूसरो में सिर्फ उलझन मिलेगी
हर किसी पर यकीन ना करे क्योंकि नमक और शक्कर का रंग एक जैसा होता है
इन्सान बातें वहीं क्लियर करता है जहां उसे रिश्ता रखना हो वरना लोग तो कहते हैं अच्छा हुआ जान छूटी
किसी को डर है कि भगवान देख रहा है किसी को भरोसा है कि भगवान देख रहा है
मनुष्य रूप, यौवन और मदिरा में खोकर अपने आप को ही भूल जाता है, लेकिन जब उसे होश आता है तो नरक का द्वार उसके सामने होता है. अर्थात सूरा-सुंदरी का सुख मनुष्य को नरक के अतिरिक्त कुछ नहीं दे सकता. इससे बचना ही श्रेयस्कर है.
इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी अपनी तुलना दूसरो से करना
ढुढो सुकून तोह ख़ुद में हे दूसरो में सिर्फ उलझन मिलेगी
हर किसी पर यकीन ना करे क्योंकि नमक और शक्कर का रंग एक जैसा होता है
इन्सान बातें वहीं क्लियर करता है जहां उसे रिश्ता रखना हो वरना लोग तो कहते हैं अच्छा हुआ जान छूटी