वजूद सबका अपना अपना है सूर्य के सामने दीपक का ना सही अंधेरे के आगे बहुत कुछ है
वक़्त का खाश होना जरूरी नही खाश के लिए वक़्त होना जरूरी है
अगर "बुरे वक्त" में कोई आकर यह "कह" दे कि.. "चिंता मत करो" मैं तुम्हारे "साथ" हूँ! तो बस ये "शब्द" ही "व्यक्ति" के लिए "औषधि" बन जाते हैं ..!!
ऐसी कोई मंजिल नहीं जहां तक पहुंचने का कोई रास्ता ना हो .
जीवन में सबसे बड़ा नुकसान हमारी मृत्यु नहीं बल्कि एक हारा और टूटा हुआ मन है
इंसान कहता हैं कि पैसा आये तो मैं कुछ कर के दिखाऊ और पैसा कहता हैं कि तू कुछ कर तो मैं आऊं.
वजूद सबका अपना अपना है सूर्य के सामने दीपक का ना सही अंधेरे के आगे बहुत कुछ है
वक़्त का खाश होना जरूरी नही खाश के लिए वक़्त होना जरूरी है
अगर "बुरे वक्त" में कोई आकर यह "कह" दे कि.. "चिंता मत करो" मैं तुम्हारे "साथ" हूँ! तो बस ये "शब्द" ही "व्यक्ति" के लिए "औषधि" बन जाते हैं ..!!
ऐसी कोई मंजिल नहीं जहां तक पहुंचने का कोई रास्ता ना हो .
जीवन में सबसे बड़ा नुकसान हमारी मृत्यु नहीं बल्कि एक हारा और टूटा हुआ मन है
इंसान कहता हैं कि पैसा आये तो मैं कुछ कर के दिखाऊ और पैसा कहता हैं कि तू कुछ कर तो मैं आऊं.