गाय चाहे जो खा ले दूध ही देगी. इसी प्रकार विद्वान कैसा भी आचरण करे, वह निश्चित ही अनुकरणीय होगा, परन्तु यह तथ्य केवल समझदार ही समझ सकते है.
अपनी तुलना दुसरो से ना करे, हर फल का स्वाद अलग अलग होता है
आजादी अच्छी चीज है, लेकिन ? कबूतर को ? आजाद कराने के लिए पिजरे का दरवाजा बिल्ली खोले तो समझदारी पिंजरे में रहने में ही है..!!
जींदगी वन-डे मैच की तरह है जिसमें रन तो बढ़ रहे है पर ओवर घट रहे है मतलब धन तो बढ़ रहा है पर उम्र घट रही है इसलिए हर दिन कुछ न कुछ पूण्य के चौके छक्के लगायें... ताकि ऊपर बैठा एम्पायर हमें खुशियों की ट्रॉफी दे
दरिया बनकर किसी को ड़ुबाने से बेहतर है, जरिया बनकर किसी को बचाया जाये
जिन्होंने आपका संघर्ष देखा है सिर्फ वही आपकी कामयाबी की कीमत जानते है औरों के लिए आप केवल भाग्यशाली व्यक्ति हैं।
गाय चाहे जो खा ले दूध ही देगी. इसी प्रकार विद्वान कैसा भी आचरण करे, वह निश्चित ही अनुकरणीय होगा, परन्तु यह तथ्य केवल समझदार ही समझ सकते है.
अपनी तुलना दुसरो से ना करे, हर फल का स्वाद अलग अलग होता है
आजादी अच्छी चीज है, लेकिन ? कबूतर को ? आजाद कराने के लिए पिजरे का दरवाजा बिल्ली खोले तो समझदारी पिंजरे में रहने में ही है..!!
जींदगी वन-डे मैच की तरह है जिसमें रन तो बढ़ रहे है पर ओवर घट रहे है मतलब धन तो बढ़ रहा है पर उम्र घट रही है इसलिए हर दिन कुछ न कुछ पूण्य के चौके छक्के लगायें... ताकि ऊपर बैठा एम्पायर हमें खुशियों की ट्रॉफी दे
दरिया बनकर किसी को ड़ुबाने से बेहतर है, जरिया बनकर किसी को बचाया जाये
जिन्होंने आपका संघर्ष देखा है सिर्फ वही आपकी कामयाबी की कीमत जानते है औरों के लिए आप केवल भाग्यशाली व्यक्ति हैं।