उलझने मैंने कई झुक के भी सुलझायी है लोग सारे तो कद के बराबर नही होते
'श्रद्धा' ज्ञान देती हैं, 'नम्रता' मान देती हैं, 'योग्यता' स्थान देती हैं पर तीनों मिल जाए तो... व्यक्ति को हर जगह 'सम्मान' देती हैं...!
अपनी अच्छाई पर इतना भरोसा रखिए कि जो भी आपको खोएगा यकीनन वो रोएगा ।
जिन्हें बुलाना पड़े, समझ लो कि वो दूर है
इंसान को अलार्म नही, जिम्मेदारियां जगाती है
जो 'इन्सान' आपकी खुशी के लिये 'हार' मान लेता है उससे आप कभी 'जीत' नही सकते
उलझने मैंने कई झुक के भी सुलझायी है लोग सारे तो कद के बराबर नही होते
'श्रद्धा' ज्ञान देती हैं, 'नम्रता' मान देती हैं, 'योग्यता' स्थान देती हैं पर तीनों मिल जाए तो... व्यक्ति को हर जगह 'सम्मान' देती हैं...!
अपनी अच्छाई पर इतना भरोसा रखिए कि जो भी आपको खोएगा यकीनन वो रोएगा ।
जिन्हें बुलाना पड़े, समझ लो कि वो दूर है
इंसान को अलार्म नही, जिम्मेदारियां जगाती है
जो 'इन्सान' आपकी खुशी के लिये 'हार' मान लेता है उससे आप कभी 'जीत' नही सकते