प्रेरणा आपको काम को शुरू करने में सहायक होती है, जबकि आदत आपको काम को करते रहने में सहायक होती है!!

प्रेरणा आपको काम को शुरू करने में सहायक होती है, जबकि आदत आपको काम को करते रहने में सहायक होती है!!

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सफल होने के बाद भी आप खुद को उस व्यक्ति से बड़ा ना समझे जिसके हाथों को पकड़ कर आपने सफलता की सीढ़ी चढ़ी

सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।

अच्छे जरूर बने लेकिन साबित करने की कोशिश ना करें...

सफल जीवन के चार सुत्र मेहनत करे तो धन बने सब्र करे तो काम मीठा बोले तो पहचान बने और इज्जत करे तो नाम

मनुष्य रूप, यौवन और मदिरा में खोकर अपने आप को ही भूल जाता है, लेकिन जब उसे होश आता है तो नरक का द्वार उसके सामने होता है. अर्थात सूरा-सुंदरी का सुख मनुष्य को नरक के अतिरिक्त कुछ नहीं दे सकता. इससे बचना ही श्रेयस्कर है.

तकलीफ़े भी अच्छी है..

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