खिचड़ी अगर बर्तन में पके तो बीमार को ठीक कर देती है और यदि दिमाग में पके तो इंसान को बीमार कर देती है
मुस्कुराने की आदत डालो क्यों की रुलाने वालो की कमी नहीं हैं..
आप चाहे कितना भी भलाई का काम कर लो, मगर, उस भलाई की उम्र सिर्फ अगली गलती होने तक ही है
पंख मिलते ही जो जमीन भूल जाता है वो ज्यादा दिन आकाश में उड़ नही पता है..
जो 'इन्सान' आपकी खुशी के लिये 'हार' मान लेता है उससे आप कभी 'जीत' नही सकते
समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।
खिचड़ी अगर बर्तन में पके तो बीमार को ठीक कर देती है और यदि दिमाग में पके तो इंसान को बीमार कर देती है
मुस्कुराने की आदत डालो क्यों की रुलाने वालो की कमी नहीं हैं..
आप चाहे कितना भी भलाई का काम कर लो, मगर, उस भलाई की उम्र सिर्फ अगली गलती होने तक ही है
पंख मिलते ही जो जमीन भूल जाता है वो ज्यादा दिन आकाश में उड़ नही पता है..
जो 'इन्सान' आपकी खुशी के लिये 'हार' मान लेता है उससे आप कभी 'जीत' नही सकते
समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।