जीवन मे कभी भी उसे प्राथमिकता मत दो जो तुम्हे केवल एक विकल्प समझता हो
यहां हर किसी को दरारों में झांकने की आदत है दरवाजा खोल दो तो कोई पूछने भी नही आयेगा
दुष्टों से दुष्टता करने में कोई दोष नहीं है.
परमात्मा का ज्ञान होने पर देह का मोह मिट जाता है. तब मन जहाँ भी जाता है, वहीं समाधि लग जाती है.
पूरे की ख्वाहिश में इंसान बहुत कुछ खोता है भूल जाता है की आधा चांद भी खूबसूरत होता है
कामयाब होने के लिए कई बार हमें जो है उसी में शुरुआत कर लेनी होती है, भले तैयारी पूरी ना हो क्योंकि यह इंतजार करने से काफी बेहतर है।
जीवन मे कभी भी उसे प्राथमिकता मत दो जो तुम्हे केवल एक विकल्प समझता हो
यहां हर किसी को दरारों में झांकने की आदत है दरवाजा खोल दो तो कोई पूछने भी नही आयेगा
दुष्टों से दुष्टता करने में कोई दोष नहीं है.
परमात्मा का ज्ञान होने पर देह का मोह मिट जाता है. तब मन जहाँ भी जाता है, वहीं समाधि लग जाती है.
पूरे की ख्वाहिश में इंसान बहुत कुछ खोता है भूल जाता है की आधा चांद भी खूबसूरत होता है
कामयाब होने के लिए कई बार हमें जो है उसी में शुरुआत कर लेनी होती है, भले तैयारी पूरी ना हो क्योंकि यह इंतजार करने से काफी बेहतर है।