थक कर ना बैठ ऐ मंज़िल के मुसाफिर, मंज़िल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आयेगा !!
गलती कबूल करने और गुनाह छोड़ने में कभी देर ना करे क्योकिं सफर जितना लम्बा होगा वापसी उतनी मुश्किल हो जायेगी
अपनी खराब आदतों पर जीत हासिल करने के समान जीवन में कोई और आनन्द नहीं होता है
अपने अंदर से अहंकार को निकालकर स्वयं को हल्का किजिये क्योंकि ऊँचा वही उठता है जो हल्का होता है।
टूटी कलम और दूसरो से जलन कभी खुद का भाग्य लिखने नही देती
लंबी छलांगों से कही बेहतर है निरंतर बढ़ते कदम... जी एक दिन आपको मंजिल तक ले जाएंगे
थक कर ना बैठ ऐ मंज़िल के मुसाफिर, मंज़िल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आयेगा !!
गलती कबूल करने और गुनाह छोड़ने में कभी देर ना करे क्योकिं सफर जितना लम्बा होगा वापसी उतनी मुश्किल हो जायेगी
अपनी खराब आदतों पर जीत हासिल करने के समान जीवन में कोई और आनन्द नहीं होता है
अपने अंदर से अहंकार को निकालकर स्वयं को हल्का किजिये क्योंकि ऊँचा वही उठता है जो हल्का होता है।
टूटी कलम और दूसरो से जलन कभी खुद का भाग्य लिखने नही देती
लंबी छलांगों से कही बेहतर है निरंतर बढ़ते कदम... जी एक दिन आपको मंजिल तक ले जाएंगे