वो ना ही मिलते तो अच्छा था… बेकार में मोहब्बत से नफ़रत हो गई…
अगर हम सुधर गए तो उनका क्या होगा जिनको हमारे पागलपन से प्यार है
खुदा करे की किसी पर कोई फ़िदा न हो, अगर हो तो मौत से पहले जुदा न हो
तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आखिर, जिसे बरसों से देखा जा रहा है
उसकी मुहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब है, अपना भी नहीं बनाती और किसी का होने भी नहीं देती
तू इतना प्यार कर जितना तू सह सके, बिछड़ना भी पड़े तो ज़िंदा रह सके
वो ना ही मिलते तो अच्छा था… बेकार में मोहब्बत से नफ़रत हो गई…
अगर हम सुधर गए तो उनका क्या होगा जिनको हमारे पागलपन से प्यार है
खुदा करे की किसी पर कोई फ़िदा न हो, अगर हो तो मौत से पहले जुदा न हो
तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आखिर, जिसे बरसों से देखा जा रहा है
उसकी मुहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब है, अपना भी नहीं बनाती और किसी का होने भी नहीं देती
तू इतना प्यार कर जितना तू सह सके, बिछड़ना भी पड़े तो ज़िंदा रह सके