अकेली रात बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो
उस हस्ती तस्वीर को क्या मालूम, उसे देखकर कितना रोया जाता है
कभी उसका दिल रखा कभी उसका दिल रखा, इस कश्मकश में भूल गए, खुद का दिल कहाँ रखा..
मै उसके लिए चाय बनाना सीखता रहा और वो पैग बनाने वाले के साथ भाग गई
दिल उसके इंतज़ार में डूबा है. जो किसी और की चाहत में डूबा है.
ना अपने पास हूं ना तेरे साथ हूं, बहुत दिनों से मैं यूं ही उदास हूं !
अकेली रात बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो
उस हस्ती तस्वीर को क्या मालूम, उसे देखकर कितना रोया जाता है
कभी उसका दिल रखा कभी उसका दिल रखा, इस कश्मकश में भूल गए, खुद का दिल कहाँ रखा..
मै उसके लिए चाय बनाना सीखता रहा और वो पैग बनाने वाले के साथ भाग गई
दिल उसके इंतज़ार में डूबा है. जो किसी और की चाहत में डूबा है.
ना अपने पास हूं ना तेरे साथ हूं, बहुत दिनों से मैं यूं ही उदास हूं !