अपनो से इतनी दूरी ना बढ़ाए की दरवाजा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े
जिंदगी उसके साथ बिताओ जिसके साथ बेखौफ होकर एक छोटे बच्चे की तरह हंस सको
वक्त बीतने के बाद अक्सर यह अहसास होता है.. जो छूट गया वो लम्हा
जिंदगी में रह गई कुछ खाली जगह को सिर्फ समझौते ही भरते है
मूर्खो से तारीफ सुनने से बुध्दिमान की डाँट सुनना ज्यादा बेहतर हैं
जीवन की परीक्षा में,कोई अंक नहीं मिलते हैं पर, लोग आपको हृदय से स्मरण करें तो, समझ लेना आप उतीर्ण हो गय
अपनो से इतनी दूरी ना बढ़ाए की दरवाजा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े
जिंदगी उसके साथ बिताओ जिसके साथ बेखौफ होकर एक छोटे बच्चे की तरह हंस सको
वक्त बीतने के बाद अक्सर यह अहसास होता है.. जो छूट गया वो लम्हा
जिंदगी में रह गई कुछ खाली जगह को सिर्फ समझौते ही भरते है
मूर्खो से तारीफ सुनने से बुध्दिमान की डाँट सुनना ज्यादा बेहतर हैं
जीवन की परीक्षा में,कोई अंक नहीं मिलते हैं पर, लोग आपको हृदय से स्मरण करें तो, समझ लेना आप उतीर्ण हो गय