"व्यक्तित्व" की भी अपनी वाणी होती है, जो "कलम"' या "जीभ" के इस्तेमाल के बिना भी, लोगों के "अंर्तमन" को छू जाती है..
यदि आपके मन में संतोष नहीं है तो दुनिया की कोई भी चीज आपको खुश नहीं कर सकती है.
बीमारी खरगोश की तरह आती है और कछुए की तरह जाती है; जबकि पैसा कछुए की तरह आता है और.खरगोश की तरह जाता है।
अपने फ़ायदे के लिए दूसरे का नुकसान कभी नहीं करे
नसीहत वो सच्ची बातें हैं, जिन्हें हम कभी ध्यान से नहीं सुनते। और … तारीफ वह धोखा है, जिसे हम पूरे ध्यान से सुनते हैं, और अपने आप पर झूठा घमंड करते हैं।
जो व्यस्त ना हो, वो ही काम आते है व्यस्त रहने वाले खुदगर्ज ही रह जाते है
"व्यक्तित्व" की भी अपनी वाणी होती है, जो "कलम"' या "जीभ" के इस्तेमाल के बिना भी, लोगों के "अंर्तमन" को छू जाती है..
यदि आपके मन में संतोष नहीं है तो दुनिया की कोई भी चीज आपको खुश नहीं कर सकती है.
बीमारी खरगोश की तरह आती है और कछुए की तरह जाती है; जबकि पैसा कछुए की तरह आता है और.खरगोश की तरह जाता है।
अपने फ़ायदे के लिए दूसरे का नुकसान कभी नहीं करे
नसीहत वो सच्ची बातें हैं, जिन्हें हम कभी ध्यान से नहीं सुनते। और … तारीफ वह धोखा है, जिसे हम पूरे ध्यान से सुनते हैं, और अपने आप पर झूठा घमंड करते हैं।
जो व्यस्त ना हो, वो ही काम आते है व्यस्त रहने वाले खुदगर्ज ही रह जाते है