ईश्वर ना काष्ठ में है, न मिट्टी में, न ही मूर्ति में. वह केवल भावना में होता है. अतः भावना ही मुख्य है.
तकदीर बदल जाती है जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो, वरना उम्र कट जाती है तकदीर को इल्जाम देते देते
जिंदगी में समस्या तो हर दिन नई खड़ी है, जीत जाते है वो जिनकी सोच कुछ बड़ी है आओ...आज मुश्किलों को हराते हैं चलो, आज दिन भर मुस्कुराते हैं..!!
एक रंग रिश्तों पर ऐसा लगाए भीगे हर शब्द पर अर्थ बहने न पाए ।
उम्र...बिना रुके सफर कर रही है, और हम... ख़्वाहिशें लेकर वहीं खड़े हैं
समय कई ज़ख्म देता है इसलिए घड़ी में फूल नही काटे होते है
ईश्वर ना काष्ठ में है, न मिट्टी में, न ही मूर्ति में. वह केवल भावना में होता है. अतः भावना ही मुख्य है.
तकदीर बदल जाती है जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो, वरना उम्र कट जाती है तकदीर को इल्जाम देते देते
जिंदगी में समस्या तो हर दिन नई खड़ी है, जीत जाते है वो जिनकी सोच कुछ बड़ी है आओ...आज मुश्किलों को हराते हैं चलो, आज दिन भर मुस्कुराते हैं..!!
एक रंग रिश्तों पर ऐसा लगाए भीगे हर शब्द पर अर्थ बहने न पाए ।
उम्र...बिना रुके सफर कर रही है, और हम... ख़्वाहिशें लेकर वहीं खड़े हैं
समय कई ज़ख्म देता है इसलिए घड़ी में फूल नही काटे होते है