रिश्ते भी इमारत की ही तरह होते हैं, हल्की - फुल्की दरारें नज़र आएं तो, ढ़हाइये नहीं मरम्मत कीजिए
जो ना मिले उसकी ही चाहत होती है, जो मिल जाये उसकी कदर कहाँ होती है
जीभ पर लगी चोट जल्दी ठिक हो जाती है लेकिन जीभ से लगी चोट कभी ठिक नहीं होती .
अगर कोई तुम्हे नजर अंदाज करे तो उसे नजर आना ही छोड़ दो
झूठ बोल कर कुछ पाने से अच्छा है सच बोलकर उसे खो दो
जब भी तुम्हारा हौसला आसमान तक जाएगा याद रखना कोई ना कोई पंख काटने जरूर आएगा.
रिश्ते भी इमारत की ही तरह होते हैं, हल्की - फुल्की दरारें नज़र आएं तो, ढ़हाइये नहीं मरम्मत कीजिए
जो ना मिले उसकी ही चाहत होती है, जो मिल जाये उसकी कदर कहाँ होती है
जीभ पर लगी चोट जल्दी ठिक हो जाती है लेकिन जीभ से लगी चोट कभी ठिक नहीं होती .
अगर कोई तुम्हे नजर अंदाज करे तो उसे नजर आना ही छोड़ दो
झूठ बोल कर कुछ पाने से अच्छा है सच बोलकर उसे खो दो
जब भी तुम्हारा हौसला आसमान तक जाएगा याद रखना कोई ना कोई पंख काटने जरूर आएगा.