बादशाह सिर्फ वक्त होता है, इन्सान तो यूँ ही गुरुर करता है
ज़िन्दगी में जो भी करना है खुदा के भरोसे और अपने दम पर कीजिए, लोगों के भरोसे पर नहीं क्योंकि, लोग कंधो पर तब ही उठाते हैं जब मिट्टी में मिलाना हो।
किसी के लिए समर्पण करना, मुश्किल नहीं है मुश्किल है उस व्यक्ति को ढूंढना जो आप के समर्पण की कद्र करे
अगर आप हमेशा अहंकार से भरे रहते हैं तो फिर इस दुनिया में आपके लिए सीखने को कुछ भी नहीं है ।
आपकी दिन की पहली विफलता तब शूरू होती हैं जब आप पाँच मिनट के लिए औऱ सोने का फैसला लेते हैं
क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।
बादशाह सिर्फ वक्त होता है, इन्सान तो यूँ ही गुरुर करता है
ज़िन्दगी में जो भी करना है खुदा के भरोसे और अपने दम पर कीजिए, लोगों के भरोसे पर नहीं क्योंकि, लोग कंधो पर तब ही उठाते हैं जब मिट्टी में मिलाना हो।
किसी के लिए समर्पण करना, मुश्किल नहीं है मुश्किल है उस व्यक्ति को ढूंढना जो आप के समर्पण की कद्र करे
अगर आप हमेशा अहंकार से भरे रहते हैं तो फिर इस दुनिया में आपके लिए सीखने को कुछ भी नहीं है ।
आपकी दिन की पहली विफलता तब शूरू होती हैं जब आप पाँच मिनट के लिए औऱ सोने का फैसला लेते हैं
क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।