कोशिशों के बावजूद हो जाती है कभी हार... होके निराश मत बैठना मन को अपने मार... बढ़ते रहना आगे सदा हो जैसा भी मौसम... पा लेती है मंजिल चींटी भी गिर गिर के हर बार!!
खुद वो बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं
लोग कहते है तुम इतना खुश कैसे रहते हो..हमने कहाँ हम किसी को खुश देखकर जलते नही और अपना दुख किसी को बताते नही
कहीं मिलेगी प्रशंसा तो, कहीं नाराजगीयो का बहाव मिलेगा कहीं मिलेगी दुआ तो, कहीं भावनाओ में दुर्भाव मिलेगा तू चलाचल राही अपने कर्मपथ पे जैसा तेरा भाव वैसा प्रभाव मिलेगा
उस व्यक्ति के लिए सभी परिस्थितियां अच्छी हैं जो अपने भीतर खुशी संजो कर रखता है
भीड़ में सभी लोग अच्छे नहीं होते और अच्छे लोगों की कभी भीड़ नहीं होती
कोशिशों के बावजूद हो जाती है कभी हार... होके निराश मत बैठना मन को अपने मार... बढ़ते रहना आगे सदा हो जैसा भी मौसम... पा लेती है मंजिल चींटी भी गिर गिर के हर बार!!
खुद वो बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं
लोग कहते है तुम इतना खुश कैसे रहते हो..हमने कहाँ हम किसी को खुश देखकर जलते नही और अपना दुख किसी को बताते नही
कहीं मिलेगी प्रशंसा तो, कहीं नाराजगीयो का बहाव मिलेगा कहीं मिलेगी दुआ तो, कहीं भावनाओ में दुर्भाव मिलेगा तू चलाचल राही अपने कर्मपथ पे जैसा तेरा भाव वैसा प्रभाव मिलेगा
उस व्यक्ति के लिए सभी परिस्थितियां अच्छी हैं जो अपने भीतर खुशी संजो कर रखता है
भीड़ में सभी लोग अच्छे नहीं होते और अच्छे लोगों की कभी भीड़ नहीं होती