दोस्ती करनी हो तो गणित के जीरो जैसी करो साहब जिसके साथ मिल जाओ उसकी कीमत बढ़ जाये
दूसरों को अपने बारे में सफाई देकर अपना वक्त खराब न करें क्योंकि लोग उतना ही समझते हैं जितनी उनकी औकात होती हैं
बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे
जैसे दीये को जलने के लिए तेल के साथ बाती की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही मनुष्य को सफलता के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है
आप अपनी गलतियों से तभी सीख सकते हैं , जब आप अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं
ये दुनिया सिर्फ उन्ही लोगो का संघर्ष जानती है जो सफल हो जाते है
दोस्ती करनी हो तो गणित के जीरो जैसी करो साहब जिसके साथ मिल जाओ उसकी कीमत बढ़ जाये
दूसरों को अपने बारे में सफाई देकर अपना वक्त खराब न करें क्योंकि लोग उतना ही समझते हैं जितनी उनकी औकात होती हैं
बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे
जैसे दीये को जलने के लिए तेल के साथ बाती की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही मनुष्य को सफलता के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है
आप अपनी गलतियों से तभी सीख सकते हैं , जब आप अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं
ये दुनिया सिर्फ उन्ही लोगो का संघर्ष जानती है जो सफल हो जाते है