वक़्त बदलते देर नही लगती इसलिए कभी भी हद से ज्यादा फूलों मत और अपनों को कभी भूलो मत
आपके आने वाले "कल" का "नसीब" आपके बीते हुए "कल" के "कर्मो" पर निर्भर करता है
पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...
माफी मांगने का मतलब यह नहीं है कि हम गलत है या सामने वाला सही है....इसका मतलब है कि हम रिश्तों को अपने अंहकार से ज्यादा महत्व देते हैं
जिन रिश्तों में आपकी मौजूदगी का कोई मतलब नही हो वहाँ से
शब्द यात्रा करते हैं... इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
वक़्त बदलते देर नही लगती इसलिए कभी भी हद से ज्यादा फूलों मत और अपनों को कभी भूलो मत
आपके आने वाले "कल" का "नसीब" आपके बीते हुए "कल" के "कर्मो" पर निर्भर करता है
पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...
माफी मांगने का मतलब यह नहीं है कि हम गलत है या सामने वाला सही है....इसका मतलब है कि हम रिश्तों को अपने अंहकार से ज्यादा महत्व देते हैं
जिन रिश्तों में आपकी मौजूदगी का कोई मतलब नही हो वहाँ से
शब्द यात्रा करते हैं... इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें