लोगो के पास बहुत कुछ है मगर मुश्किल यह है की भरोसे ओर शक है और अपने शक पर भरोसा है
ज़िन्दगी में आप जितना कम बोलते है आपकी उतनी ज्यादा सुनी जाएगा
ईश्वर ना काष्ठ में है, न मिट्टी में, न ही मूर्ति में. वह केवल भावना में होता है. अतः भावना ही मुख्य है.
अपनी छवि का ध्यान रखे, क्योंकि इसकी आयु आपकी आयु से कही ज्यादा होती है
जहाँ दूसरे को समझाना मुश्किल हो जाये, वहाँ खुद को समझा लेना बहतर होता है.
रिश्ता चाहे इस धरती पर कोई भी हो, सबका सिर्फ एक ही पासवर्ड है भरोसा
लोगो के पास बहुत कुछ है मगर मुश्किल यह है की भरोसे ओर शक है और अपने शक पर भरोसा है
ज़िन्दगी में आप जितना कम बोलते है आपकी उतनी ज्यादा सुनी जाएगा
ईश्वर ना काष्ठ में है, न मिट्टी में, न ही मूर्ति में. वह केवल भावना में होता है. अतः भावना ही मुख्य है.
अपनी छवि का ध्यान रखे, क्योंकि इसकी आयु आपकी आयु से कही ज्यादा होती है
जहाँ दूसरे को समझाना मुश्किल हो जाये, वहाँ खुद को समझा लेना बहतर होता है.
रिश्ता चाहे इस धरती पर कोई भी हो, सबका सिर्फ एक ही पासवर्ड है भरोसा