दुनिया में कोई भी चीज़ कितनी भी कीमती क्यों न हो। परन्तु.... नींद,शांति,और आनन्द से बढ़कर कुछ भी नही।
अधर्म बुद्धि से आत्मविनाश की सुचना मिलती है।
ज्वाला जगा अन्दर, किस बात से है तंग, दुनिया से नहीं, खुद से है तेरी जंग
भगवान से कुछ मांगना है तो सदबुद्धिद मांगिए बाकी सब अपने आप मिल जायेगा
कामयाब होने के लिए कई बार हमें जो है उसी में शुरुआत कर लेनी होती है, भले तैयारी पूरी ना हो क्योंकि यह इंतजार करने से काफी बेहतर है।
दुष्ट की मित्रता से शत्रु की मित्रता अच्छी होती है।
दुनिया में कोई भी चीज़ कितनी भी कीमती क्यों न हो। परन्तु.... नींद,शांति,और आनन्द से बढ़कर कुछ भी नही।
अधर्म बुद्धि से आत्मविनाश की सुचना मिलती है।
ज्वाला जगा अन्दर, किस बात से है तंग, दुनिया से नहीं, खुद से है तेरी जंग
भगवान से कुछ मांगना है तो सदबुद्धिद मांगिए बाकी सब अपने आप मिल जायेगा
कामयाब होने के लिए कई बार हमें जो है उसी में शुरुआत कर लेनी होती है, भले तैयारी पूरी ना हो क्योंकि यह इंतजार करने से काफी बेहतर है।
दुष्ट की मित्रता से शत्रु की मित्रता अच्छी होती है।