ये जिंदगी तभी तक झंड लगती है जब तक जिंदगी में पैसा ना हो
संभाल कर रखी हुई चीज और ध्यान से सुनी हुई बात, कभी न कभी काम आ ही जाती है
मुर्ख की यह प्रव्रत्ति है कि वह सदैव उन लोगों का अपमान करता है जो विद्या, शील, आयु। बुद्धि, धन और कुल में श्रेष्ट हैं तथा माननीय हैं।
मनुष्य को हमेशा यह नही सोचना चाहिए की वो अपने जीवन में कितना खुश है, बल्कि यह सोचना चाहिये की उस मनुष्य की वजह से दूसरे कितने खुश हैं
अपेक्षाएं जहां खत्म होती हैं, सुकून वहीं से शुरू होता है
इंसान को यूँ ही मतलबी नहीं कहा जाता, उसे अपने सुख से ज्यादा दुसरे के दुःख में मज़ा आता है
ये जिंदगी तभी तक झंड लगती है जब तक जिंदगी में पैसा ना हो
संभाल कर रखी हुई चीज और ध्यान से सुनी हुई बात, कभी न कभी काम आ ही जाती है
मुर्ख की यह प्रव्रत्ति है कि वह सदैव उन लोगों का अपमान करता है जो विद्या, शील, आयु। बुद्धि, धन और कुल में श्रेष्ट हैं तथा माननीय हैं।
मनुष्य को हमेशा यह नही सोचना चाहिए की वो अपने जीवन में कितना खुश है, बल्कि यह सोचना चाहिये की उस मनुष्य की वजह से दूसरे कितने खुश हैं
अपेक्षाएं जहां खत्म होती हैं, सुकून वहीं से शुरू होता है
इंसान को यूँ ही मतलबी नहीं कहा जाता, उसे अपने सुख से ज्यादा दुसरे के दुःख में मज़ा आता है