तुम्हारी गलती केवल तुम्हारी ही गलती होगी तुम्हरी हार सिर्फ तुम्हारी हार है किसी को दोष देने की बजाय अपनी गलती को सुधारा और आगे बड़ों|

तुम्हारी गलती केवल तुम्हारी ही गलती होगी तुम्हरी हार सिर्फ तुम्हारी हार है किसी को दोष देने की बजाय अपनी गलती को सुधारा और आगे बड़ों|

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खुद को अपनी नजरों से गिराना छोड़ दो, जब लोग तुम्हें ना

सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है

जिंदगी हमेशा एक मौका और देती है आसान शब्दों में जिसे “आज” कहते हैं

मित्रों से समागम, अधिक धन की प्राप्ति, पुत्र का आलिंगन, मैथुन में प्रवृत्ति, समय पर प्रिय वचन बोलना, अपने वर्ग के लोगों में उन्नति, अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति और समाज में सम्मान – ये आठ हर्ष के सार दिखाई देते हैं और ये ही लौकिक सुख के साधन भी होते हैं।

समझदार वही है जो फूँक-फूँक कर कदम रखे, पानी को छानकर पिए, शास्त्रानुसार वाक्य बोले और सोच-विचार कर कर्म करे. इस तरह किए गए कार्य में सफलता अवश्य मिलती है .

गलती कबूल करने और गुनाह छोड़ने में कभी देर ना करे क्योकिं सफर जितना लम्बा होगा वापसी उतनी मुश्किल हो जायेगी

खुद को अपनी नजरों से गिराना छोड़ दो, जब लोग तुम्हें ना

सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है

जिंदगी हमेशा एक मौका और देती है आसान शब्दों में जिसे “आज” कहते हैं

मित्रों से समागम, अधिक धन की प्राप्ति, पुत्र का आलिंगन, मैथुन में प्रवृत्ति, समय पर प्रिय वचन बोलना, अपने वर्ग के लोगों में उन्नति, अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति और समाज में सम्मान – ये आठ हर्ष के सार दिखाई देते हैं और ये ही लौकिक सुख के साधन भी होते हैं।

समझदार वही है जो फूँक-फूँक कर कदम रखे, पानी को छानकर पिए, शास्त्रानुसार वाक्य बोले और सोच-विचार कर कर्म करे. इस तरह किए गए कार्य में सफलता अवश्य मिलती है .

गलती कबूल करने और गुनाह छोड़ने में कभी देर ना करे क्योकिं सफर जितना लम्बा होगा वापसी उतनी मुश्किल हो जायेगी