तुम्हारी गलती केवल तुम्हारी ही गलती होगी तुम्हरी हार सिर्फ तुम्हारी हार है किसी को दोष देने की बजाय अपनी गलती को सुधारा और आगे बड़ों|

तुम्हारी गलती केवल तुम्हारी ही गलती होगी तुम्हरी हार सिर्फ तुम्हारी हार है किसी को दोष देने की बजाय अपनी गलती को सुधारा और आगे बड़ों|

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जरूरत से ज्यादा सोचकर हम ऐसी समस्या खड़ी कर लेते है जो असल मे है भी नही

बुरे वक्त की सबसे अच्छी बात पता है क्या है ? वो भी बीत जाता है

"उपलब्धि" और "आलोचना" एक दूसरे के मित्र हैं !! उपलब्धियां बढ़ेगी तो निश्चित ही आपकी आलोचना भी बढ़ेगी

अपानी सेहत से प्रेम कीजिये वरना आप किसी से भी प्रेम करने के लायक नही रहेंगे..

भरोशा करो लेकिन किसी के भरोशे मत रहो ।

जो आपके शब्दों का "मूल्य" नहीं समझता उसके सामने मौन रहना ही बेहतर है.

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