अकेलापन तब महसूस नही होता जब आप अकेले हो बल्कि तब महसूस होता जब कोई आपको परवाह नही करता
ख़ामोशी से भी नेक काम होते हैं, मैंने देखा है पेड़ों को छाँव देते हुए.
हकीकत को तलाश करना पड़ता है अफवाहें तो घर बैठे आप तक पहुँच जाती है
जीवन मे पछतावा करना छोड़ो और कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हे छोड़ देने पर पछताए।
लोगों को भरपूर सम्मान दीजिये.... इसलिए नहीं कि, उनका अधिकार है... बल्कि इसलिए कि, आप में संस्कार है ...!
पहले निश्चय करिएँ, फिर कार्य आरम्भ करें।
अकेलापन तब महसूस नही होता जब आप अकेले हो बल्कि तब महसूस होता जब कोई आपको परवाह नही करता
ख़ामोशी से भी नेक काम होते हैं, मैंने देखा है पेड़ों को छाँव देते हुए.
हकीकत को तलाश करना पड़ता है अफवाहें तो घर बैठे आप तक पहुँच जाती है
जीवन मे पछतावा करना छोड़ो और कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हे छोड़ देने पर पछताए।
लोगों को भरपूर सम्मान दीजिये.... इसलिए नहीं कि, उनका अधिकार है... बल्कि इसलिए कि, आप में संस्कार है ...!
पहले निश्चय करिएँ, फिर कार्य आरम्भ करें।