यह सोचकर हमेशा खुश रहो खुश रहो; जो था; अच्छा था जो बाकी है वह बेहतर है और जो आगे चलकर मिलेगा वह बेहतरीन होगा..
नींद और निंदा पर जो विजय पा लेते है.. उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता..
घमंड ना करो अपने रूप और रुपए का मोर को उसके पंखों का भोज ऊँचा उड़ने नही देता
अगर कुछ तोड़ना है तो रिकॉर्ड तोड़ो किसी का हौसला नही
"सार्वजनिक" रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत" में बताने पर "सलाह" बन जाती है...!!
“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!
यह सोचकर हमेशा खुश रहो खुश रहो; जो था; अच्छा था जो बाकी है वह बेहतर है और जो आगे चलकर मिलेगा वह बेहतरीन होगा..
नींद और निंदा पर जो विजय पा लेते है.. उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता..
घमंड ना करो अपने रूप और रुपए का मोर को उसके पंखों का भोज ऊँचा उड़ने नही देता
अगर कुछ तोड़ना है तो रिकॉर्ड तोड़ो किसी का हौसला नही
"सार्वजनिक" रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत" में बताने पर "सलाह" बन जाती है...!!
“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!