"उम्मीदों से बंधा एक जिद्दी परिंदा है इंसान, जो घायल भी उमीदो से है और जिन्दा भी उमीदों से हैं

"उम्मीदों से बंधा एक जिद्दी परिंदा है इंसान, जो घायल भी उमीदो से है और जिन्दा भी उमीदों से हैं

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पहले लोगोँ ने सिखाया था कि वक्त बदल जाता है अब वक्त ने सिखा दिया कि लोग भी बदल जाते हैँ

इतनी जल्दी दुनिया की कोई चीज नही बदलती... जितनी जल्दी इंसान की नियत और नजरे बदल जाती है..

"जीवन" में "पीछे" देखो "अनुभव" मिलेगा "जीवन में "आगे" देखो तो "आशा" मिलेगी "दायें" "बायें" देखो तो "सत्य" मिलेगा "स्वयं" के "अंदर" देखो तो "परमात्मा" और "आत्मविश्वास" मिलेगा

जो लोग मिली हुई चीज को छोड़कर उस चीज के पीछे भागते है

अधर्म बुद्धि से आत्मविनाश की सुचना मिलती है।

"आनंद" ही एक ऐसी वस्तु है जो आपके पास न होने पर भी आप दूसरों को बिना किसी असुविधा के दे सकते है

पहले लोगोँ ने सिखाया था कि वक्त बदल जाता है अब वक्त ने सिखा दिया कि लोग भी बदल जाते हैँ

इतनी जल्दी दुनिया की कोई चीज नही बदलती... जितनी जल्दी इंसान की नियत और नजरे बदल जाती है..

"जीवन" में "पीछे" देखो "अनुभव" मिलेगा "जीवन में "आगे" देखो तो "आशा" मिलेगी "दायें" "बायें" देखो तो "सत्य" मिलेगा "स्वयं" के "अंदर" देखो तो "परमात्मा" और "आत्मविश्वास" मिलेगा

जो लोग मिली हुई चीज को छोड़कर उस चीज के पीछे भागते है

अधर्म बुद्धि से आत्मविनाश की सुचना मिलती है।

"आनंद" ही एक ऐसी वस्तु है जो आपके पास न होने पर भी आप दूसरों को बिना किसी असुविधा के दे सकते है