अक्सर अकेलेपन से जो गुजरता हैं वही ज़िंदगी में सही फैसलों को चुनता हैं.
सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते
शब्द यात्रा करते हैं... इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
जो अपना आदर-सम्मान होने पर ख़ुशी से फूल नहीं उठता, और अनादर होने पर क्रोधित नहीं होता तथा गंगाजी के कुण्ड के समान जिसका मन अशांत नहीं होता, वह ज्ञानी कहलाता है।।
ये दुनिया सिर्फ उन्ही लोगो का संघर्ष जानती है जो सफल हो जाते है
अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।
अक्सर अकेलेपन से जो गुजरता हैं वही ज़िंदगी में सही फैसलों को चुनता हैं.
सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते
शब्द यात्रा करते हैं... इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
जो अपना आदर-सम्मान होने पर ख़ुशी से फूल नहीं उठता, और अनादर होने पर क्रोधित नहीं होता तथा गंगाजी के कुण्ड के समान जिसका मन अशांत नहीं होता, वह ज्ञानी कहलाता है।।
ये दुनिया सिर्फ उन्ही लोगो का संघर्ष जानती है जो सफल हो जाते है
अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।