"उम्मीदों से बंधा एक जिद्दी परिंदा है इंसान, जो घायल भी उमीदो से है और जिन्दा भी उमीदों से हैं

"उम्मीदों से बंधा एक जिद्दी परिंदा है इंसान, जो घायल भी उमीदो से है और जिन्दा भी उमीदों से हैं

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जिसने खर्च कम करने की बात सोची समझ लो उसने कमाने की अकल खो दी....

हमेशा उम्मीद से अधिक करो... सफलता आपके कदम चूमेगी...

आप ही अपने काम आएंगे... सीखिए ख़ुद से मशवरा करना....!!

ये वक्त की नजाकत और बदलते दौर की मजबूरी है लड़के को पराठे ? और लड़की को कराटे ? सिखाना बहुत जरूरी है

दुःख पर ध्यान दोगे तो हमेशा दुःखी ही रहोगे..सुख पर ध्यान दोगे तो सुखी रहोगे जिस चीज पर तुम ध्यान दोगे वह सक्रिय हो जाती है.. ध्यान सबसे बड़ी कुंजी है

बुरे वक्त की सबसे अच्छी बात पता है क्या है ? वो भी बीत जाता है

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