"उम्मीदों से बंधा एक जिद्दी परिंदा है इंसान, जो घायल भी उमीदो से है और जिन्दा भी उमीदों से हैं

"उम्मीदों से बंधा एक जिद्दी परिंदा है इंसान, जो घायल भी उमीदो से है और जिन्दा भी उमीदों से हैं

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यदि तुम वह चाहते हो जो तुम्हारे पास नही है, तो तुम्हे वह करना होगा जो आज तक नही किया

सबसे बड़ा गुरु ठोकर हैं खाते जाओगे सीखते जाओगे.

मूर्ख को उपदेश शत्रु के समान लगता है. लोभियों अथवा कंजूसो को याचक (भिखारी) शत्रु सा लगता है. व्यभिचारिणी स्त्री को उसका पति शत्रु लगता है, तो चोरों को चंद्रमा शत्रु लगता है.

क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।

सामने हो मंजिल तो रास्ते न मोड़ना, जो भी मन में हो वो सपना न तोड़ना कदम कदम पे मिलेगी मुश्किल आपको, बस सितारे चुनने के लिए जमीन मत छोड़ना

जिंदगी में कुछ करना और कुछ बनना हैं, तो अकेले रहने की आदत डालो

यदि तुम वह चाहते हो जो तुम्हारे पास नही है, तो तुम्हे वह करना होगा जो आज तक नही किया

सबसे बड़ा गुरु ठोकर हैं खाते जाओगे सीखते जाओगे.

मूर्ख को उपदेश शत्रु के समान लगता है. लोभियों अथवा कंजूसो को याचक (भिखारी) शत्रु सा लगता है. व्यभिचारिणी स्त्री को उसका पति शत्रु लगता है, तो चोरों को चंद्रमा शत्रु लगता है.

क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।

सामने हो मंजिल तो रास्ते न मोड़ना, जो भी मन में हो वो सपना न तोड़ना कदम कदम पे मिलेगी मुश्किल आपको, बस सितारे चुनने के लिए जमीन मत छोड़ना

जिंदगी में कुछ करना और कुछ बनना हैं, तो अकेले रहने की आदत डालो