"उम्मीदों से बंधा एक जिद्दी परिंदा है इंसान, जो घायल भी उमीदो से है और जिन्दा भी उमीदों से हैं

"उम्मीदों से बंधा एक जिद्दी परिंदा है इंसान, जो घायल भी उमीदो से है और जिन्दा भी उमीदों से हैं

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इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है, क्योंकि सफलता का आनंद उठाने के लिए ये ज़रूरी है।

मौन रहना अच्छा है परन्तु....

“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!

क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।

किसी के लिए समर्पण करना, मुश्किल नहीं है मुश्किल है उस व्यक्ति को ढूंढना जो आप के समर्पण की कद्र करे

अच्छी ज़िन्दगी जीने के बस दो ही तरीके हैं ! एक जो पसंद है उसे हासिल करलो या जो हासिल है उसे पसंद करना सीखलो !!

इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है, क्योंकि सफलता का आनंद उठाने के लिए ये ज़रूरी है।

मौन रहना अच्छा है परन्तु....

“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!

क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।

किसी के लिए समर्पण करना, मुश्किल नहीं है मुश्किल है उस व्यक्ति को ढूंढना जो आप के समर्पण की कद्र करे

अच्छी ज़िन्दगी जीने के बस दो ही तरीके हैं ! एक जो पसंद है उसे हासिल करलो या जो हासिल है उसे पसंद करना सीखलो !!