""कामयाबी"" के सफर में "धूप" का बड़ा महत्व होता हैं! क्योंकि ""छांव"" मिलते ही "कदम" रुकने लगते है।
जो सच बोलता है, सबसे अधिक नफ़रत लोग उसी से करते हैं।
“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!
जब तक जीवन है तब तक सीखते रहो, क्योंकि अनुभव ही सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है
अभिमान नहीं होना चाहिए कि मुझे किसी की जरूरत नहीं पड़ेगी, और यह वहम भी नहीं होना चाहिए कि सबको मेरी जरूरत पड़ेगी......!!
जरूरत से ज्यादा सोचना भी इंसान की
""कामयाबी"" के सफर में "धूप" का बड़ा महत्व होता हैं! क्योंकि ""छांव"" मिलते ही "कदम" रुकने लगते है।
जो सच बोलता है, सबसे अधिक नफ़रत लोग उसी से करते हैं।
“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!
जब तक जीवन है तब तक सीखते रहो, क्योंकि अनुभव ही सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है
अभिमान नहीं होना चाहिए कि मुझे किसी की जरूरत नहीं पड़ेगी, और यह वहम भी नहीं होना चाहिए कि सबको मेरी जरूरत पड़ेगी......!!
जरूरत से ज्यादा सोचना भी इंसान की