क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।
सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है
कपड़े और चेहरे अक्सर जुठ बोलते है इंसान की असलियत तो वक़्त ही बताता है
भूल जीवन का एक पेज है और रिश्ते पूरी किताब, जरूरत पड़े तो भूल का एक पेज फाड़ देना लेकिन एक छोटे से पेज के लिए पूरी किताब नही
जैसे दीये को जलने के लिए तेल के साथ बाती की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही मनुष्य को सफलता के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है
सफर का मजा लेना हो तो साथ में सामान कम रखिए, और ज़िन्दगी का मजा लेना हैं तो दिल में अरमान कम रखिए।
क़दर तो वो होती है जो किसी की मौजूदगी में हो, जो किसी के बाद हो.... उसे पछतावा कहते हैं ।
सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है
कपड़े और चेहरे अक्सर जुठ बोलते है इंसान की असलियत तो वक़्त ही बताता है
भूल जीवन का एक पेज है और रिश्ते पूरी किताब, जरूरत पड़े तो भूल का एक पेज फाड़ देना लेकिन एक छोटे से पेज के लिए पूरी किताब नही
जैसे दीये को जलने के लिए तेल के साथ बाती की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही मनुष्य को सफलता के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है
सफर का मजा लेना हो तो साथ में सामान कम रखिए, और ज़िन्दगी का मजा लेना हैं तो दिल में अरमान कम रखिए।