आपका परम मित्र भी किसी कारण वश, आपका परम शत्रु बनकर खड़ा हो सकता है
...किसी ने क्या खूब लिखा है "वक़्त" निकालकर "बाते" कर लिया करो "अपनों से" अगर "अपने ही" न रहेंगे तो "वक़्त" का क्या करोगे....!"
रत्न तो लाख मिले एक ह्रदय धन न मिला, दर्द हर वक्त मिला, चैन किसी क्षण न मिला, ढूँढ़ते-ढूँढ़ते ढल गई धूप जीवन की मगर, दूसरी बार लौट के हमें बचपन न मिला...!
कभी यह मत सोचो कि आप अकेले हो बल्कि यह सोचो की आप अकेले ही काफी हो
आप सफलता तब तक नहीं प्राप्त कर सकते जब तक आप में असफल होने का साहस न हो…!
छोटी छोटी बाते दिल में रखने से, बड़े बड़े रिश्तें कमजोर हो जाते है।
आपका परम मित्र भी किसी कारण वश, आपका परम शत्रु बनकर खड़ा हो सकता है
...किसी ने क्या खूब लिखा है "वक़्त" निकालकर "बाते" कर लिया करो "अपनों से" अगर "अपने ही" न रहेंगे तो "वक़्त" का क्या करोगे....!"
रत्न तो लाख मिले एक ह्रदय धन न मिला, दर्द हर वक्त मिला, चैन किसी क्षण न मिला, ढूँढ़ते-ढूँढ़ते ढल गई धूप जीवन की मगर, दूसरी बार लौट के हमें बचपन न मिला...!
कभी यह मत सोचो कि आप अकेले हो बल्कि यह सोचो की आप अकेले ही काफी हो
आप सफलता तब तक नहीं प्राप्त कर सकते जब तक आप में असफल होने का साहस न हो…!
छोटी छोटी बाते दिल में रखने से, बड़े बड़े रिश्तें कमजोर हो जाते है।