लिबास कितना भी किमती हो घटीया किरदार को छुपा नहीं सकता
नेत्र केवल हमे दृष्टि प्रदान करते है परंतु हम कब.. किसमे क्या देखते है ये हमारी भावनाओ पर निर्भर करता है।
तो क्या हुआ जो पहली बार में सफलता नहीं मिली, वैसे तो ईश्वर आज तक भी नहीं मिला, लेकिन क्या हमने पूजा करना छोड़ दिया
सिर्फ जहर ही मौत नही देता कुछ लोगो की बाते भी काफी होती है
सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है
दिल में बुराई रखने से बेहतर है, की नाराजगी जाहिर कर दो
लिबास कितना भी किमती हो घटीया किरदार को छुपा नहीं सकता
नेत्र केवल हमे दृष्टि प्रदान करते है परंतु हम कब.. किसमे क्या देखते है ये हमारी भावनाओ पर निर्भर करता है।
तो क्या हुआ जो पहली बार में सफलता नहीं मिली, वैसे तो ईश्वर आज तक भी नहीं मिला, लेकिन क्या हमने पूजा करना छोड़ दिया
सिर्फ जहर ही मौत नही देता कुछ लोगो की बाते भी काफी होती है
सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है
दिल में बुराई रखने से बेहतर है, की नाराजगी जाहिर कर दो