संभव और असंभव के बिच की दुरी, व्यक्ति के निश्चय पर निर्भर करती है !!

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जब तक किसी व्यक्ति द्वारा अपनी संभावनाओं से अधिक कार्य नहीं किया जाता है, तब तक उस व्यक्ति द्वारा वह सब कुछ नहीं किया जा सकेगा जो वह कर सकता है

बहुत ज़रूरी है जिंदगी में थोड़ा खालीपन क्योंकि यही वो समय है जहाँ हमारी मुलाकात 'हमसे' होती है

शर्म की अमीरी से इज्जत की गरीबी अच्छी है।

किसी व्यक्ति के प्रति इतना भी समर्पण नही होना चाहिये की आप स्वयं को धीरे धीरे खोने लगे

क्वांटिटी के चक्कर में कभी ना जाएं क्योंकि नई मूंगफली के बाजार में आने से बादाम के दाम नहीं गिरते ।

रिश्ता रखो तो सच्चा नही तो अलविदा ही अच्छा

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