संभव और असंभव के बिच की दुरी, व्यक्ति के निश्चय पर निर्भर करती है !!

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स्वयं को ऐसा बनाओ कि जहाँ से तुम चले जाओ वहाँ तुम्हें सब याद करें और जहाँ तुम पहुँचने वाले हो वहाँ तुम्हारा सब इंतज़ार करें

जैसे दीये को जलने के लिए तेल के साथ बाती की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही मनुष्य को सफलता के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है

“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !

ज़िन्दगी में यही देखना ज़रूरी नहीं है, कि कौन हमारे आगे है या कौन हमारे पीछे.... कभी यह भी देखना चाहिये कि,  हम किसके साथ हैं, और कौन हमारे साथ है.....

वक्त, ख्वाहिशें और सपने हाथ में बंधी घड़ी की तरह होते हैं जिसे हम उतार कर रख भी दें तो भी चलती रहती है

अगर आपके अंदर धैर्य है तो निश्चित ही आप ज़िन्दगी के हर कठिन से कठिन फैसले का सही निर्णय कर सकते हैं।

स्वयं को ऐसा बनाओ कि जहाँ से तुम चले जाओ वहाँ तुम्हें सब याद करें और जहाँ तुम पहुँचने वाले हो वहाँ तुम्हारा सब इंतज़ार करें

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ज़िन्दगी में यही देखना ज़रूरी नहीं है, कि कौन हमारे आगे है या कौन हमारे पीछे.... कभी यह भी देखना चाहिये कि,  हम किसके साथ हैं, और कौन हमारे साथ है.....

वक्त, ख्वाहिशें और सपने हाथ में बंधी घड़ी की तरह होते हैं जिसे हम उतार कर रख भी दें तो भी चलती रहती है

अगर आपके अंदर धैर्य है तो निश्चित ही आप ज़िन्दगी के हर कठिन से कठिन फैसले का सही निर्णय कर सकते हैं।