संभव और असंभव के बिच की दुरी, व्यक्ति के निश्चय पर निर्भर करती है !!

संभव और असंभव के बिच की दुरी, व्यक्ति के निश्चय पर निर्भर करती है !!

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पैर में मोच और गिरी हुई सोच, कभी इंसान को आगे बढ़ने नहीं देती

जीवन के प्रति जिस व्यक्ति के पास सबसे कम_शिकायतें हैं वही सबसे अधिक सुखी है

प्रेम कि शिक्षा लेनी है तो भंवरे से लो. कठोर लकड़ी को छेद देने वाला भँवरा, कमल में स्वयं को बंद कर लेता है तो सिर्फ इसलिए कि उसे कमल से प्रेम होता है. यदि वह कमल को छेदकर बहार आ जायेगा तो कमल के प्रति उसका प्रेम रहा ही कहाँ?

होकर मायूस न यूँ शाम की तरह ढलते रहिये, जिंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये

मौन एक ऐसा तर्क है जिसका खण्डन कर पाना अत्यंत दुष्कर है

जब सोच में मोच आती है तब हर रिश्ते में खरोंच आती हैं...

पैर में मोच और गिरी हुई सोच, कभी इंसान को आगे बढ़ने नहीं देती

जीवन के प्रति जिस व्यक्ति के पास सबसे कम_शिकायतें हैं वही सबसे अधिक सुखी है

प्रेम कि शिक्षा लेनी है तो भंवरे से लो. कठोर लकड़ी को छेद देने वाला भँवरा, कमल में स्वयं को बंद कर लेता है तो सिर्फ इसलिए कि उसे कमल से प्रेम होता है. यदि वह कमल को छेदकर बहार आ जायेगा तो कमल के प्रति उसका प्रेम रहा ही कहाँ?

होकर मायूस न यूँ शाम की तरह ढलते रहिये, जिंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये

मौन एक ऐसा तर्क है जिसका खण्डन कर पाना अत्यंत दुष्कर है

जब सोच में मोच आती है तब हर रिश्ते में खरोंच आती हैं...