आप चाहे कितना भी भलाई का काम कर लो, मगर, उस भलाई की उम्र सिर्फ अगली गलती होने तक ही है
अगर आप अपना पैसा गिन सकते हो तो आपको निश्चय ही और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है
निकलता है हर रोज़ 'सूरज', ये बताने के लिए.. कि उजाले बांट देने से उजाले कम नही होते..
आप ही अपने काम आएंगे... सीखिए ख़ुद से मशवरा करना....!!
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है
आपकी दिन की पहली विफलता तब शूरू होती हैं जब आप पाँच मिनट के लिए औऱ सोने का फैसला लेते हैं
आप चाहे कितना भी भलाई का काम कर लो, मगर, उस भलाई की उम्र सिर्फ अगली गलती होने तक ही है
अगर आप अपना पैसा गिन सकते हो तो आपको निश्चय ही और ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है
निकलता है हर रोज़ 'सूरज', ये बताने के लिए.. कि उजाले बांट देने से उजाले कम नही होते..
आप ही अपने काम आएंगे... सीखिए ख़ुद से मशवरा करना....!!
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है
आपकी दिन की पहली विफलता तब शूरू होती हैं जब आप पाँच मिनट के लिए औऱ सोने का फैसला लेते हैं