जरूरत से ज्यादा सोचकर हम ऐसी समस्या खड़ी कर लेते है जो असल मे है भी नही
मुकुदर की लिखावट का एक ऐसा भी कायदा हो देर से किस्मत खुलने वालो का दुगना फायदा हो
हर प्रशंसा करने वाला आपका शुभचिंतक नही होता
कोई कितना भी झूठा और कपटी हो आपके साथ आप तब भी सच्चे बने रहिए क्योंकि किसी बीमार को देखकर स्वयं को बीमार कर लेना ये समझदारी नही मूर्खता है..
सिर्फ आसमान छू लेना ही कामयाबी नहीं है असली कामयाबी तो वो है कि आसमान भी छू लो, और पाँव भी ज़मीन पर हों
जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं रातों से लड़ना पड़ता है
जरूरत से ज्यादा सोचकर हम ऐसी समस्या खड़ी कर लेते है जो असल मे है भी नही
मुकुदर की लिखावट का एक ऐसा भी कायदा हो देर से किस्मत खुलने वालो का दुगना फायदा हो
हर प्रशंसा करने वाला आपका शुभचिंतक नही होता
कोई कितना भी झूठा और कपटी हो आपके साथ आप तब भी सच्चे बने रहिए क्योंकि किसी बीमार को देखकर स्वयं को बीमार कर लेना ये समझदारी नही मूर्खता है..
सिर्फ आसमान छू लेना ही कामयाबी नहीं है असली कामयाबी तो वो है कि आसमान भी छू लो, और पाँव भी ज़मीन पर हों
जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं रातों से लड़ना पड़ता है