कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता
जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं रातों से लड़ना पड़ता है
हम दिए को तो फूक मार के भुझा सकते है मगर अगरबत्ती को नही क्योंकि जो महकता है उसे कोन भुझा सकता है और जो जलता है वो तो खुद ही भुझ जाता है
हमारा 'व्यवहार' कई बार हमारे 'ज्ञान' से अधिक 'अच्छा' साबित होता है। क्योंकि जीवन में जब 'विषम' परिस्थितियां आती हैं तब ज्ञान 'हार' सकता है परन्तु 'व्यवहार' से हमेशा 'जीत' होने की 'संभावना' रहती है
महक गुलाब की आएगी तुम्हारे हाँथों से, किसी के रास्ते से
आपके आने वाले "कल" का "नसीब" आपके बीते हुए "कल" के "कर्मो" पर निर्भर करता है
कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता
जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं रातों से लड़ना पड़ता है
हम दिए को तो फूक मार के भुझा सकते है मगर अगरबत्ती को नही क्योंकि जो महकता है उसे कोन भुझा सकता है और जो जलता है वो तो खुद ही भुझ जाता है
हमारा 'व्यवहार' कई बार हमारे 'ज्ञान' से अधिक 'अच्छा' साबित होता है। क्योंकि जीवन में जब 'विषम' परिस्थितियां आती हैं तब ज्ञान 'हार' सकता है परन्तु 'व्यवहार' से हमेशा 'जीत' होने की 'संभावना' रहती है
महक गुलाब की आएगी तुम्हारे हाँथों से, किसी के रास्ते से
आपके आने वाले "कल" का "नसीब" आपके बीते हुए "कल" के "कर्मो" पर निर्भर करता है