प्रतिभा ईश्वर से मिलती है, नतमस्तक रहें..! ख्याति समाज से मिलती है, आभारी रहें..! लेकिन मनोवृत्ति और घमंड स्वयं से मिलते है
मूर्ख को उपदेश शत्रु के समान लगता है. लोभियों अथवा कंजूसो को याचक (भिखारी) शत्रु सा लगता है. व्यभिचारिणी स्त्री को उसका पति शत्रु लगता है, तो चोरों को चंद्रमा शत्रु लगता है.
अपेक्षाएं जहां खत्म होती हैं, सुकून वहीं से शुरू होता है
यदि सफल होना चाहते हो, तो पहले अपने ‘अभिमान’ को नाश कर डालो ।
दुनिया की हर चीज ठोकर लगने से टूट जाती है, एक कामयाबी ही है जो ठोकर लगने से मिलती है
दूसरों की गलती से भी सीखा करो खुद की गलती से सीखने चलोगे तो सफलता जल्दी नहीं मिलेगी
प्रतिभा ईश्वर से मिलती है, नतमस्तक रहें..! ख्याति समाज से मिलती है, आभारी रहें..! लेकिन मनोवृत्ति और घमंड स्वयं से मिलते है
मूर्ख को उपदेश शत्रु के समान लगता है. लोभियों अथवा कंजूसो को याचक (भिखारी) शत्रु सा लगता है. व्यभिचारिणी स्त्री को उसका पति शत्रु लगता है, तो चोरों को चंद्रमा शत्रु लगता है.
अपेक्षाएं जहां खत्म होती हैं, सुकून वहीं से शुरू होता है
यदि सफल होना चाहते हो, तो पहले अपने ‘अभिमान’ को नाश कर डालो ।
दुनिया की हर चीज ठोकर लगने से टूट जाती है, एक कामयाबी ही है जो ठोकर लगने से मिलती है
दूसरों की गलती से भी सीखा करो खुद की गलती से सीखने चलोगे तो सफलता जल्दी नहीं मिलेगी