मिट्टी का मटका और परिवार की कीमत सिर्फ बनाने वालो को पता होती है तोड़ने वालो को नहीं.||

मिट्टी का मटका और परिवार की कीमत सिर्फ बनाने वालो को पता होती है तोड़ने वालो को नहीं.||

Share:

More Like This

जब तक हम किसी भी काम को करने की कोशिश नही करते हैं, जब तक हमे वो काम नामुमकिन ही लगता है

कोई किसी को सिखा नही सकता जब खुद में इच्छा जागती है तभी कोई सिख पाता है

"सार्वजनिक"​ रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत"​ में बताने पर ​"सलाह"​ बन जाती है...!!

जो ना मिले उसकी ही चाहत होती है, जो मिल जाये उसकी कदर कहाँ होती है

जिन लोगो को 1 लाख की घड़ी और 100 रुपए की घड़ी में फर्क नजर नही आता उन लोगो से दूर ही रहो तो बेहतर है ये आपकी सोच खत्म कर देंगे

लगातार हो रही असफलताओ से निराश नही होना चाहिए क्योक़ि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है।

जब तक हम किसी भी काम को करने की कोशिश नही करते हैं, जब तक हमे वो काम नामुमकिन ही लगता है

कोई किसी को सिखा नही सकता जब खुद में इच्छा जागती है तभी कोई सिख पाता है

"सार्वजनिक"​ रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत"​ में बताने पर ​"सलाह"​ बन जाती है...!!

जो ना मिले उसकी ही चाहत होती है, जो मिल जाये उसकी कदर कहाँ होती है

जिन लोगो को 1 लाख की घड़ी और 100 रुपए की घड़ी में फर्क नजर नही आता उन लोगो से दूर ही रहो तो बेहतर है ये आपकी सोच खत्म कर देंगे

लगातार हो रही असफलताओ से निराश नही होना चाहिए क्योक़ि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है।