शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं
याद रखना, सपना तुम्हारे है, तो पूरा भी तुम ही करोगे .! न ही हालात तुम्हारे हिसाब से होंगे और न लोग
नेत्र केवल हमे दृष्टि प्रदान करते है परंतु हम कब.. किसमे क्या देखते है ये हमारी भावनाओ पर निर्भर करता है।
किसी को हरा देना बहुत ही आसान है लेकिन किसी को जीतना बहुत ही मुश्किल
अगर सफल होना हैं तो गुस्सा, बेइज्जती, अपमान बहुत जरूरी हैं
अगर आपके बड़े सपने हैं तो उन्हें नकारात्मक लोगों से बचाए।
शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं
याद रखना, सपना तुम्हारे है, तो पूरा भी तुम ही करोगे .! न ही हालात तुम्हारे हिसाब से होंगे और न लोग
नेत्र केवल हमे दृष्टि प्रदान करते है परंतु हम कब.. किसमे क्या देखते है ये हमारी भावनाओ पर निर्भर करता है।
किसी को हरा देना बहुत ही आसान है लेकिन किसी को जीतना बहुत ही मुश्किल
अगर सफल होना हैं तो गुस्सा, बेइज्जती, अपमान बहुत जरूरी हैं
अगर आपके बड़े सपने हैं तो उन्हें नकारात्मक लोगों से बचाए।