किसी भी कार्य में पल भर का भी विलम्ब न करें।
अपने हौंसले को यह मत बताओ कि तुम्हारी तकलीफ कितनी बड़ी है अपनी तकलीफ को यह बताओ कि तुम्हारा हौंसला कितना बड़ा है
कई जीत बाकी है कई हार बाकी है, अभी तो जिंदगी का सार बाकी है। यहां से चले हैं नई मंजिल के लिए, यह तो एक पन्ना था अभी तो पुरी किताब बाकी है॥
यह सोचकर हमेशा खुश रहो खुश रहो; जो था; अच्छा था जो बाकी है वह बेहतर है और जो आगे चलकर मिलेगा वह बेहतरीन होगा..
खिचड़ी अगर बर्तन में पके तो बीमार को ठीक कर देती है और यदि दिमाग में पके तो इंसान को बीमार कर देती है
शब्द यात्रा करते हैं इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें
किसी भी कार्य में पल भर का भी विलम्ब न करें।
अपने हौंसले को यह मत बताओ कि तुम्हारी तकलीफ कितनी बड़ी है अपनी तकलीफ को यह बताओ कि तुम्हारा हौंसला कितना बड़ा है
कई जीत बाकी है कई हार बाकी है, अभी तो जिंदगी का सार बाकी है। यहां से चले हैं नई मंजिल के लिए, यह तो एक पन्ना था अभी तो पुरी किताब बाकी है॥
यह सोचकर हमेशा खुश रहो खुश रहो; जो था; अच्छा था जो बाकी है वह बेहतर है और जो आगे चलकर मिलेगा वह बेहतरीन होगा..
खिचड़ी अगर बर्तन में पके तो बीमार को ठीक कर देती है और यदि दिमाग में पके तो इंसान को बीमार कर देती है
शब्द यात्रा करते हैं इसलिए पीठ पीछे भी, किसी की निंदा न करें