'दिखावा' और 'झूठ' बोलकर व्यव्हार बनाने से अच्छा है, 'सच' बोलकर 'दुश्मन' बना लो, तुम्हारे साथ कभी 'विश्वाश्घात' नहीं होगा...

'दिखावा' और 'झूठ' बोलकर व्यव्हार बनाने से अच्छा है, 'सच' बोलकर 'दुश्मन' बना लो, तुम्हारे साथ कभी 'विश्वाश्घात' नहीं होगा...

Share:

More Like This

रिश्ते चाहे कितने ही बुरे हो उन्हे तोङना मत क्योकि पानी चाहे कितना भी गंदा हो अगर प्यास नही बुझा सकता वो आग तो बुझा सकता है।

वो लोग अच्छे वक़्त में तुम्हारे साथ रहने के काबिल नहीं है जिन्होंने तुम्हारे बुरे वक़्त में तुम्हारा साथ छोड़ दिया था।

ज़िन्दगी बीत जाएगी चार दिन में इसे अपने में नहीं जिओ बल्कि अपनों के साथ जियो।

जो व्यस्त ना हो, वो ही काम आते है व्यस्त रहने वाले खुदगर्ज ही रह जाते है

अपने फ़ायदे के लिए दूसरे का नुकसान कभी नहीं करे

जब हम बोलना नही जानते थे तो हमारे बोले बिना'माँ' हमारी बातो को समझ जाती थी। और आज हम हर बात पर कहते है छोङो भी 'माँ' आप नही समझोंगी।

रिश्ते चाहे कितने ही बुरे हो उन्हे तोङना मत क्योकि पानी चाहे कितना भी गंदा हो अगर प्यास नही बुझा सकता वो आग तो बुझा सकता है।

वो लोग अच्छे वक़्त में तुम्हारे साथ रहने के काबिल नहीं है जिन्होंने तुम्हारे बुरे वक़्त में तुम्हारा साथ छोड़ दिया था।

ज़िन्दगी बीत जाएगी चार दिन में इसे अपने में नहीं जिओ बल्कि अपनों के साथ जियो।

जो व्यस्त ना हो, वो ही काम आते है व्यस्त रहने वाले खुदगर्ज ही रह जाते है

अपने फ़ायदे के लिए दूसरे का नुकसान कभी नहीं करे

जब हम बोलना नही जानते थे तो हमारे बोले बिना'माँ' हमारी बातो को समझ जाती थी। और आज हम हर बात पर कहते है छोङो भी 'माँ' आप नही समझोंगी।