'दिखावा' और 'झूठ' बोलकर व्यव्हार बनाने से अच्छा है, 'सच' बोलकर 'दुश्मन' बना लो, तुम्हारे साथ कभी 'विश्वाश्घात' नहीं होगा...

'दिखावा' और 'झूठ' बोलकर व्यव्हार बनाने से अच्छा है, 'सच' बोलकर 'दुश्मन' बना लो, तुम्हारे साथ कभी 'विश्वाश्घात' नहीं होगा...

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ज़िन्दगी बीत जाएगी चार दिन में इसे अपने में नहीं जिओ बल्कि अपनों के साथ जियो।

बीमारी खरगोश की तरह आती है और कछुए की तरह जाती है; जबकि पैसा कछुए की तरह आता है और.खरगोश की तरह जाता है।

"ज़िन्दगी गुज़र जाती है ये ढूँढने में कि, ढूंढना क्या है अंत में तलाश सिमट जाती है इस सुकून में कि, जो मिला वो भी कहाँ साथ लेकर जाना है "

भावनाओं में बहकर किसी के सामने अपनी कमजोरियाँ को बता देना सबसे बड़ी मुर्खता है.

आपके जीवन में बुराइयाँ आये, इस से पहले उन्हें मिट्टी में मिला दो… वरना वो तुम्हे मिट्टी में मिला देगी।

जो व्यस्त है आज वो कल भी व्यस्त ही रहेंगे पर तुम जिन्हे आज काम का नहीं समझ रहे देख लेना कल वही तुम्हारे काम नहीं आएँगे।

ज़िन्दगी बीत जाएगी चार दिन में इसे अपने में नहीं जिओ बल्कि अपनों के साथ जियो।

बीमारी खरगोश की तरह आती है और कछुए की तरह जाती है; जबकि पैसा कछुए की तरह आता है और.खरगोश की तरह जाता है।

"ज़िन्दगी गुज़र जाती है ये ढूँढने में कि, ढूंढना क्या है अंत में तलाश सिमट जाती है इस सुकून में कि, जो मिला वो भी कहाँ साथ लेकर जाना है "

भावनाओं में बहकर किसी के सामने अपनी कमजोरियाँ को बता देना सबसे बड़ी मुर्खता है.

आपके जीवन में बुराइयाँ आये, इस से पहले उन्हें मिट्टी में मिला दो… वरना वो तुम्हे मिट्टी में मिला देगी।

जो व्यस्त है आज वो कल भी व्यस्त ही रहेंगे पर तुम जिन्हे आज काम का नहीं समझ रहे देख लेना कल वही तुम्हारे काम नहीं आएँगे।