कोई भी ऊँचाई इतनी कठिन नहीं है कि उस तक नहीं पहुँचा जा सके|

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मूर्ख को उपदेश शत्रु के समान लगता है. लोभियों अथवा कंजूसो को याचक (भिखारी) शत्रु सा लगता है. व्यभिचारिणी स्त्री को उसका पति शत्रु लगता है, तो चोरों को चंद्रमा शत्रु लगता है.

जीवन मे मेहनत करने से दिमाग साफ रहता हैं और सत्य बोलने से दिल साफ रहता हैं.

पैसा जीवन मे उतना ही जरूरी है कि खुद को मांगना ना पड़े और जो मांगे उसको देने से मना न कर सको

मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।

ख्वाहिश भले ही छोटी सी हो, लेकिन उसे पूरा करने की जिद होनी चाहिये

"सार्वजनिक"​ रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत"​ में बताने पर ​"सलाह"​ बन जाती है...!!

मूर्ख को उपदेश शत्रु के समान लगता है. लोभियों अथवा कंजूसो को याचक (भिखारी) शत्रु सा लगता है. व्यभिचारिणी स्त्री को उसका पति शत्रु लगता है, तो चोरों को चंद्रमा शत्रु लगता है.

जीवन मे मेहनत करने से दिमाग साफ रहता हैं और सत्य बोलने से दिल साफ रहता हैं.

पैसा जीवन मे उतना ही जरूरी है कि खुद को मांगना ना पड़े और जो मांगे उसको देने से मना न कर सको

मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।

ख्वाहिश भले ही छोटी सी हो, लेकिन उसे पूरा करने की जिद होनी चाहिये

"सार्वजनिक"​ रूप से की गई "आलोचना" अपमान में बदल जाती है और .... "एकांत"​ में बताने पर ​"सलाह"​ बन जाती है...!!