ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं, जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं।
जीत की आदत अच्छी है, मगर कुछ रिश्तों में हार जाना बेहतर है
इन्सान बातें वहीं क्लियर करता है जहां उसे रिश्ता रखना हो वरना लोग तो कहते हैं अच्छा हुआ जान छूटी
इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
अपने PAST को इतना याद ना करो कि वो तुम्हारा FUTURE DECIDE करने लगे
मुश्किलें दिलों के इरादों को आजमाएंगी, आँखों के पर्दों को निगाहों से हटाएँगी, गिरकर भी हम को संभलना होगा, ये ठोकरें ही हमको चलना सिखाएंगी।
ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं, जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं।
जीत की आदत अच्छी है, मगर कुछ रिश्तों में हार जाना बेहतर है
इन्सान बातें वहीं क्लियर करता है जहां उसे रिश्ता रखना हो वरना लोग तो कहते हैं अच्छा हुआ जान छूटी
इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
अपने PAST को इतना याद ना करो कि वो तुम्हारा FUTURE DECIDE करने लगे
मुश्किलें दिलों के इरादों को आजमाएंगी, आँखों के पर्दों को निगाहों से हटाएँगी, गिरकर भी हम को संभलना होगा, ये ठोकरें ही हमको चलना सिखाएंगी।