अगर आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने मैं असफल हो जाते है, तो रणनीति बदलिए, न कि लक्ष्य|

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इंसान के अंदर ही समा जाए, वो स्वाभिमान होता है... और जो बाहर छलक जाए वो अभिमान होता है...

भोजन महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है कार्य व उसके प्रति निष्ठा. पेट तो जानवर भी भर लेते हैं. अतः मानव बनो.

"इतने बड़े बनो कि जब आप खड़े हों तो कोई बैठा न रहे !"

आपके आने वाले "कल" का "नसीब" आपके बीते हुए "कल" के "कर्मो" पर निर्भर करता है

ख़ुशियाँ चाहे किसी के भी साथ बाँट लो "लेकिन" गम भरोसेमंद के साथ ही बाँटना चाहिए

सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है

इंसान के अंदर ही समा जाए, वो स्वाभिमान होता है... और जो बाहर छलक जाए वो अभिमान होता है...

भोजन महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है कार्य व उसके प्रति निष्ठा. पेट तो जानवर भी भर लेते हैं. अतः मानव बनो.

"इतने बड़े बनो कि जब आप खड़े हों तो कोई बैठा न रहे !"

आपके आने वाले "कल" का "नसीब" आपके बीते हुए "कल" के "कर्मो" पर निर्भर करता है

ख़ुशियाँ चाहे किसी के भी साथ बाँट लो "लेकिन" गम भरोसेमंद के साथ ही बाँटना चाहिए

सबसे बड़ी रिस्क तब रहती है जब हमें पता नही रहता कि हम क्या कर रहे है