एक ख़्वाब था की वह भी मुझे चाहे मेरी तरह पर ख़्वाब ही रह गया
तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती
यक़ीं न आए तो इक बार पूछ कर देखो जो हँस रहा है वो ज़ख़्मों से चूर निकलेगा...
मैने तो बस तुमसे बेइंतहा मोहबत कि है, ना तुम्हे पाने के बारे मे सोचा है ना खोने के बारे मे
किसी को क्या बताएं कितने मजबूर हैं हम, चाहा है एक तुम्हें और तुम्ही से दूर है हम
जाने कैसे हो जाते हैं लोग कभी इसके कभी उसके और फिर किसी और के
एक ख़्वाब था की वह भी मुझे चाहे मेरी तरह पर ख़्वाब ही रह गया
तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती
यक़ीं न आए तो इक बार पूछ कर देखो जो हँस रहा है वो ज़ख़्मों से चूर निकलेगा...
मैने तो बस तुमसे बेइंतहा मोहबत कि है, ना तुम्हे पाने के बारे मे सोचा है ना खोने के बारे मे
किसी को क्या बताएं कितने मजबूर हैं हम, चाहा है एक तुम्हें और तुम्ही से दूर है हम
जाने कैसे हो जाते हैं लोग कभी इसके कभी उसके और फिर किसी और के