बस इतना सा असर होगा हमारी यादों का, कि कभी-कभी तुम बिना बात के मुस्कुराओगे.

बस इतना सा असर होगा हमारी यादों का, कि कभी-कभी तुम बिना बात के मुस्कुराओगे.

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तुम पर सिर्फ मेरा हक़ है ऐसा कहने वाला ही अब साथ छोड़ गया

क्या गिला करें उन बातों से​ ​क्या शिक़वा करें उन रातों से​​​ ​​कहें भला किसकी खता इसे हम​ ​​कोई खेल गया फिर से जज़बातों से

जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते हैं

तेरे दिल के बाजार में मै रोज़ बिकती हुं, कुछ लफ्ज़ तेरी यादों के हर रोज़ लिखती हुं

जब मोहब्बत बे-पनाह हो जाये ना.. तोह फिर पनाह कही नही मिलती

मोत से पहेले भी ऎक मौत होती हे..! देखो जरा तुम जुदा होकर किसी से..!

तुम पर सिर्फ मेरा हक़ है ऐसा कहने वाला ही अब साथ छोड़ गया

क्या गिला करें उन बातों से​ ​क्या शिक़वा करें उन रातों से​​​ ​​कहें भला किसकी खता इसे हम​ ​​कोई खेल गया फिर से जज़बातों से

जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते हैं

तेरे दिल के बाजार में मै रोज़ बिकती हुं, कुछ लफ्ज़ तेरी यादों के हर रोज़ लिखती हुं

जब मोहब्बत बे-पनाह हो जाये ना.. तोह फिर पनाह कही नही मिलती

मोत से पहेले भी ऎक मौत होती हे..! देखो जरा तुम जुदा होकर किसी से..!