बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!
एक घुटन सी होती है जीने में जब कोई दिल में तो रहता है पर साथ नहीं
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
फिर एक दिन ऐसा भी आया जिन्दगी में..की मैंने तेरा नाम सुनकर मुस्कुराना छोड़ दिया।
जब दिल गैरो मैं लग जाए तब अपनों मैं खामिया नजर आने लगती है
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!
एक घुटन सी होती है जीने में जब कोई दिल में तो रहता है पर साथ नहीं
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
फिर एक दिन ऐसा भी आया जिन्दगी में..की मैंने तेरा नाम सुनकर मुस्कुराना छोड़ दिया।
जब दिल गैरो मैं लग जाए तब अपनों मैं खामिया नजर आने लगती है