तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती
जब रिश्ते ही दम तोड़ चुके हों.... तो फिर प्यार, इजहार, गलती का अहसास, सही गलत कुछ भी मैटर नहीं करता।
मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी
ज़िन्दगी का सबसे लम्बा सफर एक मन से दूसरे मन तक पहुँचना है...और इसी में सबसे ज्यादा समय लगता है...
चैन से गुज़र रही थी ज़िन्दगी, और फिर तुम मिल गए!
अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।
तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती
जब रिश्ते ही दम तोड़ चुके हों.... तो फिर प्यार, इजहार, गलती का अहसास, सही गलत कुछ भी मैटर नहीं करता।
मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी
ज़िन्दगी का सबसे लम्बा सफर एक मन से दूसरे मन तक पहुँचना है...और इसी में सबसे ज्यादा समय लगता है...
चैन से गुज़र रही थी ज़िन्दगी, और फिर तुम मिल गए!
अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।