सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
जिनको जाना होता है वो चले ही जाते है किसी के रोने से उनको कोई फर्क नहीं पड़ता
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
दो पल भी नहीं गुज़रते तुम्हारे बिन, ये ज़िन्दगी ना जाने कैसे गुज़ारेंगे!
बहुत भीड हो गई है लोगों के दिलों में...इसलिए आजकल हम अकेले ही रहते हैं...!
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
जिनको जाना होता है वो चले ही जाते है किसी के रोने से उनको कोई फर्क नहीं पड़ता
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
दो पल भी नहीं गुज़रते तुम्हारे बिन, ये ज़िन्दगी ना जाने कैसे गुज़ारेंगे!
बहुत भीड हो गई है लोगों के दिलों में...इसलिए आजकल हम अकेले ही रहते हैं...!
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...