कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं.. मौत इंसानों को आती है यादों को नहीं
मालूम है मुझे की ये मुमकिन नहीं मगर ? एक आस सी रहती है कि तुम याद करोगे मुझें ?
कोई रूह का तलबगार मिले तो हम भी महोब्बत कर ले… यहाँ दिल तो बहुत मिलते है, बस कोई दिल से नहीं मिलता
नसीब का सब खेल है वरना मोहब्बत तो हम भी दीवाने की तरह किये थे.
दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है
उस हंसती हुई तस्वीर को क्या मालूम की कोई उसे देख कितने रोता है
कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं.. मौत इंसानों को आती है यादों को नहीं
मालूम है मुझे की ये मुमकिन नहीं मगर ? एक आस सी रहती है कि तुम याद करोगे मुझें ?
कोई रूह का तलबगार मिले तो हम भी महोब्बत कर ले… यहाँ दिल तो बहुत मिलते है, बस कोई दिल से नहीं मिलता
नसीब का सब खेल है वरना मोहब्बत तो हम भी दीवाने की तरह किये थे.
दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है
उस हंसती हुई तस्वीर को क्या मालूम की कोई उसे देख कितने रोता है