याद तो रोज करते है उन्हें, पर उन्होने कभी महसूस ही न किया.. ?
अगर ख़ुशी मिलती है तुम्हे हम से जुदा होकर तोह दुआ है खुदा से की तुम्हे कभी हम न मिले
आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की, हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की
उनको लगी खरोंच का पता पुरे शहर को है, हमारे गहरे जख्म की कहीं चर्चा तक नहीं !!
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
लोग कहते है हम मुस्कराते बहुत है…और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते…
याद तो रोज करते है उन्हें, पर उन्होने कभी महसूस ही न किया.. ?
अगर ख़ुशी मिलती है तुम्हे हम से जुदा होकर तोह दुआ है खुदा से की तुम्हे कभी हम न मिले
आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की, हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की
उनको लगी खरोंच का पता पुरे शहर को है, हमारे गहरे जख्म की कहीं चर्चा तक नहीं !!
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
लोग कहते है हम मुस्कराते बहुत है…और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते…