बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
उसने पुछा जिंदगी किसने बरबाद की । हमने ऊँगली उठाई और अपने ही दिल पर रख ली ।
आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....
माना कि तुझसे दूरियां कुछ ज्यादा ही बढ़ गई हैं पर तेरे हिस्से का वक़्त आज भी तन्हा गुजरता है
मुस्कुराने की अब वजह याद नहीं रहती, पाला है बड़े नाज़ से मेरे गमों ने मुझे!!
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
उसने पुछा जिंदगी किसने बरबाद की । हमने ऊँगली उठाई और अपने ही दिल पर रख ली ।
आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....
माना कि तुझसे दूरियां कुछ ज्यादा ही बढ़ गई हैं पर तेरे हिस्से का वक़्त आज भी तन्हा गुजरता है
मुस्कुराने की अब वजह याद नहीं रहती, पाला है बड़े नाज़ से मेरे गमों ने मुझे!!