माथे पर सजा कर रखना है। यह भारत मां का गहना है। हिंदी भाषा हमको प्यारी है। ये ही हमारी पहचान है।

माथे पर सजा कर रखना है। यह भारत मां का गहना है। हिंदी भाषा हमको प्यारी है। ये ही हमारी पहचान है।

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सुन रहा हैं न तू रो रहा हूँ मैं

सच केह रहा हैं ये दीवाना, दिल ना किसी से लगाना!

कोई मुझको यूँ मिला हैं जैसे बंजारे को घर

दर्द दिलो के कम होजाते अगर में और तुम हम होजाते!

सुन रहा हैं न तू रो रहा हूँ मैं

सच केह रहा हैं ये दीवाना, दिल ना किसी से लगाना!

कोई मुझको यूँ मिला हैं जैसे बंजारे को घर

दर्द दिलो के कम होजाते अगर में और तुम हम होजाते!