जब बच्चे थे तब अधूरे एहसास, टूटे सपने, अधूरे होमवर्क और टूटे खिलौने सब अच्छे लगते थे.
घर से निकला हुआ हर शख्स आवारा नहीं होता, वो तो उसके हालात उसे भटकने पर मजबूर कर देते है।
कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं
अहसास बदल जाता है वक्त के साथ और पता भी नही चलता है, क्योंकि मोहब्बत और नफरत एक ही दिल से जो होती हैं.
अहसास ही बदल जाते हैं बस और कुछ नहीं होता, मोहब्बत और नफरत एक ही दिल से होती है।
इन आँखों को जब तेरा दीदार हो जाता है दिन कोई भी हो मेरा त्यौहार हो जाता है.
जब बच्चे थे तब अधूरे एहसास, टूटे सपने, अधूरे होमवर्क और टूटे खिलौने सब अच्छे लगते थे.
घर से निकला हुआ हर शख्स आवारा नहीं होता, वो तो उसके हालात उसे भटकने पर मजबूर कर देते है।
कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं
अहसास बदल जाता है वक्त के साथ और पता भी नही चलता है, क्योंकि मोहब्बत और नफरत एक ही दिल से जो होती हैं.
अहसास ही बदल जाते हैं बस और कुछ नहीं होता, मोहब्बत और नफरत एक ही दिल से होती है।
इन आँखों को जब तेरा दीदार हो जाता है दिन कोई भी हो मेरा त्यौहार हो जाता है.