तमनाओं की महफ़िल तो हर कोई सजाता है मगर पूरी उसकी होती हैं जो तकदीर लेकर आता है
घुस्सा आने पर चिल्लाने के लिए ताकत नहीं लगती, घुस्सा आने पर शांत बैठने पर ताकत ज़रूर लगती है।
वो मासूम रोटी चुरा कर चोर बन गया, और लोग मुल्क खा गए, कानून लिखते-लिखते।
दुःख से पता नहीं क्यों लोग डरते हैं लोग जबकि हमारे जीवन की शुरुआत ही रोने से हुई है.
ये तो ज़रूरी नहीं कि कुत्ता ही वफादार निकले, समय आने पर आपका वफादार भी कुत्ता निकल सकता है।
टूटे हुए सपने और छूटे हुए अपने जिन्दगी में बार-बार नहीं मिलते हैं इसलिए इनकी चीजों की कद्र करो।
तमनाओं की महफ़िल तो हर कोई सजाता है मगर पूरी उसकी होती हैं जो तकदीर लेकर आता है
घुस्सा आने पर चिल्लाने के लिए ताकत नहीं लगती, घुस्सा आने पर शांत बैठने पर ताकत ज़रूर लगती है।
वो मासूम रोटी चुरा कर चोर बन गया, और लोग मुल्क खा गए, कानून लिखते-लिखते।
दुःख से पता नहीं क्यों लोग डरते हैं लोग जबकि हमारे जीवन की शुरुआत ही रोने से हुई है.
ये तो ज़रूरी नहीं कि कुत्ता ही वफादार निकले, समय आने पर आपका वफादार भी कुत्ता निकल सकता है।
टूटे हुए सपने और छूटे हुए अपने जिन्दगी में बार-बार नहीं मिलते हैं इसलिए इनकी चीजों की कद्र करो।