इस दौर में हर कोई Busy होने का चोला ओढ़कर बैठा है मानो खुद को इंसान की बस्ती का खुदा समझ बैठा है.

इस दौर में हर कोई Busy होने का चोला ओढ़कर बैठा है मानो खुद को इंसान की बस्ती का खुदा समझ बैठा है.

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आज कल लोग अपने आराम में इतना व्यस्त हो गए है की उनके पास अपनों से मिलने का वक़्त ही नहीं है।

स्मार्ट हो आप तो बुरे हम भी नही, इंटेलिजेंट हो आप तो बुद्धू हम भी नही, दोस्ती करके कहते हो बिजी है हम……

हम दुनिया की परवाह करने में व्यस्त रह गये जिंदगी ना जाने कब गुजर गई आहिस्ता से और हम फकत हाथ मलते रह गये.

घोंसला बनाने में हम यूँ मशगूल हो गए, की उड़ने को पंख भी थे..ये भी भूल गए ……

सब दौड़ रहे हैं किसी दौड़ में यहाँ समझ नहीं आ रहा कोई जीतता भी है या सब बस भाग ही रहे हैं।

जिंदगी को भी कशमकश ही बना दिया है हमने, व्यस्त तो जरुर है इसे जीने में, बेखबर इसके मकसद से….

आज कल लोग अपने आराम में इतना व्यस्त हो गए है की उनके पास अपनों से मिलने का वक़्त ही नहीं है।

स्मार्ट हो आप तो बुरे हम भी नही, इंटेलिजेंट हो आप तो बुद्धू हम भी नही, दोस्ती करके कहते हो बिजी है हम……

हम दुनिया की परवाह करने में व्यस्त रह गये जिंदगी ना जाने कब गुजर गई आहिस्ता से और हम फकत हाथ मलते रह गये.

घोंसला बनाने में हम यूँ मशगूल हो गए, की उड़ने को पंख भी थे..ये भी भूल गए ……

सब दौड़ रहे हैं किसी दौड़ में यहाँ समझ नहीं आ रहा कोई जीतता भी है या सब बस भाग ही रहे हैं।

जिंदगी को भी कशमकश ही बना दिया है हमने, व्यस्त तो जरुर है इसे जीने में, बेखबर इसके मकसद से….