मानसिक पीड़ा का एकमात्र मारक शारीरिक पीड़ा है . ||

मानसिक पीड़ा का एकमात्र मारक शारीरिक पीड़ा है . ||

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आँसू वे शब्द हैं, जिनको दिल कभी बयां नहीं कर सकता है।

कभी लगाव ज़्यादा था, इसलिए... आज दर्द ज़्यादा है।

जीतने वाले लाभ देखते हैं, हारने वाले दर्द. ||

अब तो ऐसा लगता है की, मैं ही वो अकेला इंसान हूं, जिसने मुझे निराश नहीं किया।

एक बात सिखाई है... ताजुर्वे ने हमें, एक नया दर्द ही पुराने दर्द की दवा है।

वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम तो नहीं बन सकता, दर्द कुछ ऐसे होते हैं, ता-उम्र रुलाने वाले।

आँसू वे शब्द हैं, जिनको दिल कभी बयां नहीं कर सकता है।

कभी लगाव ज़्यादा था, इसलिए... आज दर्द ज़्यादा है।

जीतने वाले लाभ देखते हैं, हारने वाले दर्द. ||

अब तो ऐसा लगता है की, मैं ही वो अकेला इंसान हूं, जिसने मुझे निराश नहीं किया।

एक बात सिखाई है... ताजुर्वे ने हमें, एक नया दर्द ही पुराने दर्द की दवा है।

वक़्त हर ज़ख़्म का मरहम तो नहीं बन सकता, दर्द कुछ ऐसे होते हैं, ता-उम्र रुलाने वाले।