मानसिक पीड़ा का एकमात्र मारक शारीरिक पीड़ा है . ||

मानसिक पीड़ा का एकमात्र मारक शारीरिक पीड़ा है . ||

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आप छिपा नहीं सकते हो, की.... आप अंदर से टूटे हुए हो।

जीने की वजह देखी थी हमने उनमे। ये नही सोचे थे, की.... कभी वो खुद ही हमारे दर्द की वजह बन जाएंगे।

कभी-कभी सिर्फ आपकी आंखें ही नही होती, जहा से आंसू गिरते हैं।

कभी लगाव ज़्यादा था, इसलिए... आज दर्द ज़्यादा है।

सबसे ज़्यादा तकलीफ तो तब होती है, जब वो इंसान, जो कल आपको सबसे ज़्यादा खास महसूस करता था। आज वही आपको इतना अकेला और कमजोर महसूस कराता है।

मेरी मुस्कुराहट के पीछे एक टूटा हुआ दिल है, मैं ठीक नहीं हूं, मैं बिल्कुल भी ठीक नही हूं।

आप छिपा नहीं सकते हो, की.... आप अंदर से टूटे हुए हो।

जीने की वजह देखी थी हमने उनमे। ये नही सोचे थे, की.... कभी वो खुद ही हमारे दर्द की वजह बन जाएंगे।

कभी-कभी सिर्फ आपकी आंखें ही नही होती, जहा से आंसू गिरते हैं।

कभी लगाव ज़्यादा था, इसलिए... आज दर्द ज़्यादा है।

सबसे ज़्यादा तकलीफ तो तब होती है, जब वो इंसान, जो कल आपको सबसे ज़्यादा खास महसूस करता था। आज वही आपको इतना अकेला और कमजोर महसूस कराता है।

मेरी मुस्कुराहट के पीछे एक टूटा हुआ दिल है, मैं ठीक नहीं हूं, मैं बिल्कुल भी ठीक नही हूं।