कभी लगाव ज़्यादा था, इसलिए... आज दर्द ज़्यादा है।
भीड़ में भी तन्हा रहना मुझको सिखा दिया, तेरी मोहब्बत ने दुनिया को झूठा कहना सिखा दिया, किसी दर्द या ख़ुशी का एहसास नहीं है अब तो, सब कुछ ज़िन्दगी ने चुप-चाप सहना सिखा दिया।
सच में हंसने के लिए आपको अपनी पीड़ा के साथ खेलने में सक्षम होना चाहिए . ||
जिनकी "हसी" से कभी "मेरा दर्द" गायब हुआ करता था, आज "मेरा दर्द" उनके लिये "हसी की वजह" बन चुकी है।
मेरी मुस्कुराहट के पीछे एक टूटा हुआ दिल है, मैं ठीक नहीं हूं, मैं बिल्कुल भी ठीक नही हूं।
जीने की वजह देखी थी हमने उनमे। ये नही सोचे थे, की.... कभी वो खुद ही हमारे दर्द की वजह बन जाएंगे।
कभी लगाव ज़्यादा था, इसलिए... आज दर्द ज़्यादा है।
भीड़ में भी तन्हा रहना मुझको सिखा दिया, तेरी मोहब्बत ने दुनिया को झूठा कहना सिखा दिया, किसी दर्द या ख़ुशी का एहसास नहीं है अब तो, सब कुछ ज़िन्दगी ने चुप-चाप सहना सिखा दिया।
सच में हंसने के लिए आपको अपनी पीड़ा के साथ खेलने में सक्षम होना चाहिए . ||
जिनकी "हसी" से कभी "मेरा दर्द" गायब हुआ करता था, आज "मेरा दर्द" उनके लिये "हसी की वजह" बन चुकी है।
मेरी मुस्कुराहट के पीछे एक टूटा हुआ दिल है, मैं ठीक नहीं हूं, मैं बिल्कुल भी ठीक नही हूं।
जीने की वजह देखी थी हमने उनमे। ये नही सोचे थे, की.... कभी वो खुद ही हमारे दर्द की वजह बन जाएंगे।