जितना कम आप अपना ह्रदय दूसरों के समक्ष खोलेंगे, उतनी अधिक आपके ह्रदय को पीड़ा होगी. ||

जितना कम आप अपना ह्रदय दूसरों के समक्ष खोलेंगे, उतनी अधिक आपके ह्रदय को पीड़ा होगी. ||

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मानसिक पीड़ा का एकमात्र मारक शारीरिक पीड़ा है . ||

तकलीफ तो इस बात से होती है, की जिनसे हम आज भी प्यार करते है, वो भी कभी हमसे प्यार किया करती थी।

अपने दिल में किसीको खास जगह मत दो, उस जगह को देना आसान है, पर जब सामने वाले को इसकी कदर ना हो तब दर्द बहुत ज़्यादा होता है।

गलत लोगों के साथ खेलने से अच्छा है की... आप अकेले रहो।

कष्ट/दुःख पाप का परिणाम है अथवा दुःख का जन्म पाप से होता है.

जीने की वजह देखी थी हमने उनमे। ये नही सोचे थे, की.... कभी वो खुद ही हमारे दर्द की वजह बन जाएंगे।

मानसिक पीड़ा का एकमात्र मारक शारीरिक पीड़ा है . ||

तकलीफ तो इस बात से होती है, की जिनसे हम आज भी प्यार करते है, वो भी कभी हमसे प्यार किया करती थी।

अपने दिल में किसीको खास जगह मत दो, उस जगह को देना आसान है, पर जब सामने वाले को इसकी कदर ना हो तब दर्द बहुत ज़्यादा होता है।

गलत लोगों के साथ खेलने से अच्छा है की... आप अकेले रहो।

कष्ट/दुःख पाप का परिणाम है अथवा दुःख का जन्म पाप से होता है.

जीने की वजह देखी थी हमने उनमे। ये नही सोचे थे, की.... कभी वो खुद ही हमारे दर्द की वजह बन जाएंगे।