कष्ट/दुःख पाप का परिणाम है अथवा दुःख का जन्म पाप से होता है.
वेदना के उपरान्त सुख अत्यंत मधुर होता हैं.
जीने की वजह देखी थी हमने उनमे। ये नही सोचे थे, की.... कभी वो खुद ही हमारे दर्द की वजह बन जाएंगे।
न हर्फ़-ए-शिकायत न इश्क़ रहा तुमसे जितना दिया था हँस कर बड़ी ख़ूबसूरती से मुस्कुराकर छीन लिया तुमने
एक बात सिखाई है... ताजुर्वे ने हमें, एक नया दर्द ही पुराने दर्द की दवा है।
मानसिक पीड़ा का एकमात्र मारक शारीरिक पीड़ा है . ||
कष्ट/दुःख पाप का परिणाम है अथवा दुःख का जन्म पाप से होता है.
वेदना के उपरान्त सुख अत्यंत मधुर होता हैं.
जीने की वजह देखी थी हमने उनमे। ये नही सोचे थे, की.... कभी वो खुद ही हमारे दर्द की वजह बन जाएंगे।
न हर्फ़-ए-शिकायत न इश्क़ रहा तुमसे जितना दिया था हँस कर बड़ी ख़ूबसूरती से मुस्कुराकर छीन लिया तुमने
एक बात सिखाई है... ताजुर्वे ने हमें, एक नया दर्द ही पुराने दर्द की दवा है।
मानसिक पीड़ा का एकमात्र मारक शारीरिक पीड़ा है . ||