मैं अब लोगों पर भरोसा नहीं करता हूं। क्योंकि मैं निराश होकर थक चुका हूं।
इस तरह मेरी तरफ मेरा मसीहा देखे, दर्द दिल में ही रहे और दवा हो जाए।
हँसते-हँसते जिसने मेरे हर दर्द को संभाला है उसी माँ को मैने कमरे में अकेले रोते पाया है
अब तो ऐसा लगता है की, मैं ही वो अकेला इंसान हूं, जिसने मुझे निराश नहीं किया।
ऐसा लगता है, कि... मेरे शरीर का हर दूसरा हिस्सा भी अब टूट गया है।
भीड़ में भी तन्हा रहना मुझको सिखा दिया, तेरी मोहब्बत ने दुनिया को झूठा कहना सिखा दिया, किसी दर्द या ख़ुशी का एहसास नहीं है अब तो, सब कुछ ज़िन्दगी ने चुप-चाप सहना सिखा दिया।
मैं अब लोगों पर भरोसा नहीं करता हूं। क्योंकि मैं निराश होकर थक चुका हूं।
इस तरह मेरी तरफ मेरा मसीहा देखे, दर्द दिल में ही रहे और दवा हो जाए।
हँसते-हँसते जिसने मेरे हर दर्द को संभाला है उसी माँ को मैने कमरे में अकेले रोते पाया है
अब तो ऐसा लगता है की, मैं ही वो अकेला इंसान हूं, जिसने मुझे निराश नहीं किया।
ऐसा लगता है, कि... मेरे शरीर का हर दूसरा हिस्सा भी अब टूट गया है।
भीड़ में भी तन्हा रहना मुझको सिखा दिया, तेरी मोहब्बत ने दुनिया को झूठा कहना सिखा दिया, किसी दर्द या ख़ुशी का एहसास नहीं है अब तो, सब कुछ ज़िन्दगी ने चुप-चाप सहना सिखा दिया।