खेल है जिंदगी, आँख मिचौली का... मजबूरिया छिपी है, हर काम के पीछे, स्वार्थ छिपा है, हर सलाम के पीछे...

खेल है जिंदगी, आँख मिचौली का... मजबूरिया छिपी है, हर काम के पीछे, स्वार्थ छिपा है, हर सलाम के पीछे...

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कष्ट/दुःख पाप का परिणाम है अथवा दुःख का जन्म पाप से होता है.

कभी-कभी सिर्फ आपकी आंखें ही नही होती, जहा से आंसू गिरते हैं।

आप छिपा नहीं सकते हो, की.... आप अंदर से टूटे हुए हो।

लबो पर जब किसी के दर्द का अफ़साना आता है, हमें रह-रह कर अपना दिल-ए-दीवाना आता है।

तुमपे भरोसा करने की कीमत, हम अब आसुओ से चुका रहे है।

अपेक्षा सभी हृदय-पीड़ा की जड़ है. ||

कष्ट/दुःख पाप का परिणाम है अथवा दुःख का जन्म पाप से होता है.

कभी-कभी सिर्फ आपकी आंखें ही नही होती, जहा से आंसू गिरते हैं।

आप छिपा नहीं सकते हो, की.... आप अंदर से टूटे हुए हो।

लबो पर जब किसी के दर्द का अफ़साना आता है, हमें रह-रह कर अपना दिल-ए-दीवाना आता है।

तुमपे भरोसा करने की कीमत, हम अब आसुओ से चुका रहे है।

अपेक्षा सभी हृदय-पीड़ा की जड़ है. ||