खेल है जिंदगी, आँख मिचौली का... मजबूरिया छिपी है, हर काम के पीछे, स्वार्थ छिपा है, हर सलाम के पीछे...

खेल है जिंदगी, आँख मिचौली का... मजबूरिया छिपी है, हर काम के पीछे, स्वार्थ छिपा है, हर सलाम के पीछे...

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किसी से ये उम्मीद रखना, के.... "वो पूरी ज़िन्दगी हमारे साथ चलेंगे...." बाद में हमे ही सबसे ज़्यादा दर्द देता है।

लोग कहते है.... अपने दिल की सुनो, मगर जब दिल ही लाख टुकड़ो में बटा हुआ हो, तब किस टुकड़े की सुने, और किसको देखे.....

जिनकी "हसी" से कभी "मेरा दर्द" गायब हुआ करता था, आज "मेरा दर्द" उनके लिये "हसी की वजह" बन चुकी है।

कोई मरहम नहीं चाहिये, जख्म मिटाने के लिये, बस तेरी एक झलक ही काफी है, मेरे दर्द को भुलाने के लिये ।

एक बात सिखाई है... ताजुर्वे ने हमें, एक नया दर्द ही पुराने दर्द की दवा है।

डर बुराई की अपेक्षा से उत्पन्न होने वाले दर्द है.

अरस्तु

किसी से ये उम्मीद रखना, के.... "वो पूरी ज़िन्दगी हमारे साथ चलेंगे...." बाद में हमे ही सबसे ज़्यादा दर्द देता है।

लोग कहते है.... अपने दिल की सुनो, मगर जब दिल ही लाख टुकड़ो में बटा हुआ हो, तब किस टुकड़े की सुने, और किसको देखे.....

जिनकी "हसी" से कभी "मेरा दर्द" गायब हुआ करता था, आज "मेरा दर्द" उनके लिये "हसी की वजह" बन चुकी है।

कोई मरहम नहीं चाहिये, जख्म मिटाने के लिये, बस तेरी एक झलक ही काफी है, मेरे दर्द को भुलाने के लिये ।

एक बात सिखाई है... ताजुर्वे ने हमें, एक नया दर्द ही पुराने दर्द की दवा है।

डर बुराई की अपेक्षा से उत्पन्न होने वाले दर्द है.

अरस्तु