कभी भी अपना दर्द सबको न बतायें क्योंकि सबके घर पर मरहम नहीं होता, मगर नमक हर एक के घर होता है!!
ज़िन्दगी और तुमने मुझे इस हद तक दर्द दिया, की... अब मैं वो हँसता हुआ इंसान ना रहा जो मैं कभी हुआ करता था।
जिनकी "हसी" से कभी "मेरा दर्द" गायब हुआ करता था, आज "मेरा दर्द" उनके लिये "हसी की वजह" बन चुकी है।
अब तो ऐसा लगता है की, मैं ही वो अकेला इंसान हूं, जिसने मुझे निराश नहीं किया।
तुमपे भरोसा करने की कीमत, हम अब आसुओ से चुका रहे है।
न हर्फ़-ए-शिकायत न इश्क़ रहा तुमसे जितना दिया था हँस कर बड़ी ख़ूबसूरती से मुस्कुराकर छीन लिया तुमने
कभी भी अपना दर्द सबको न बतायें क्योंकि सबके घर पर मरहम नहीं होता, मगर नमक हर एक के घर होता है!!
ज़िन्दगी और तुमने मुझे इस हद तक दर्द दिया, की... अब मैं वो हँसता हुआ इंसान ना रहा जो मैं कभी हुआ करता था।
जिनकी "हसी" से कभी "मेरा दर्द" गायब हुआ करता था, आज "मेरा दर्द" उनके लिये "हसी की वजह" बन चुकी है।
अब तो ऐसा लगता है की, मैं ही वो अकेला इंसान हूं, जिसने मुझे निराश नहीं किया।
तुमपे भरोसा करने की कीमत, हम अब आसुओ से चुका रहे है।
न हर्फ़-ए-शिकायत न इश्क़ रहा तुमसे जितना दिया था हँस कर बड़ी ख़ूबसूरती से मुस्कुराकर छीन लिया तुमने