कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं
अगर कसमे सच्ची होती तो सबसे पहले खुदा मरता।
क्या पता था कि मोहब्बत ही हो जाएगी, हमें तो बस तुम्हारा मुस्कुराना अच्छा लगा था
उसी से पूछ लो उसके इश्क की कीमत, हम तो बस उसके भरोसे पर बिक गए।
जो आप पर आँखे मूँद करके विश्वास करता हो, ऐसे इंसानों को कभी धोखा न दें क्योकि ऐसे इंसान किस्मत वालों को ही मिलते हैं।
नींद चुराने वाले हमसे पूछते हैं सोते क्यों नहीं हो, इतनी ही फ़िक्र है तुम्हें तो फिर हमारे होते क्यों नहीं हो
कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं
अगर कसमे सच्ची होती तो सबसे पहले खुदा मरता।
क्या पता था कि मोहब्बत ही हो जाएगी, हमें तो बस तुम्हारा मुस्कुराना अच्छा लगा था
उसी से पूछ लो उसके इश्क की कीमत, हम तो बस उसके भरोसे पर बिक गए।
जो आप पर आँखे मूँद करके विश्वास करता हो, ऐसे इंसानों को कभी धोखा न दें क्योकि ऐसे इंसान किस्मत वालों को ही मिलते हैं।
नींद चुराने वाले हमसे पूछते हैं सोते क्यों नहीं हो, इतनी ही फ़िक्र है तुम्हें तो फिर हमारे होते क्यों नहीं हो